बालाघाट में आईएमए की तीन दिवसीय स्टेट कांफ्रेंस:दिल्ली, मुंबई के डॉक्टर बोले- प्रकृति है तो जीवन है, इसलिए इसका सरंक्षण करें

बालाघाट जिले में पहली बार इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की तीन दिवसीय स्टेट कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। ‘इकोपल्स-प्रकृति का पोषण करें’ थीम पर आधारित इस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, नागपुर सहित भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और अन्य जिलों से सैकड़ों डॉक्टर शामिल हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की अवधारणा के अनुसार, यह कॉन्फ्रेंस प्रकृति से मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को जोड़ने के साथ-साथ चिकित्सीय क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों पर केंद्रित है। वक्ताओं ने चिकित्सा को प्रकृति से जोड़ने और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के प्रति लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति है तो जीवन है। इसलिए प्रकृति का सरंक्षण करें। कार्यक्रम में सांसद भी पहुंची शनिवार को दूसरे दिन के सत्र की शुरुआत सांसद भारती पारधी, पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन, आयोग सदस्य मौसम हरिनखेड़े और नपाध्यक्ष भारती ठाकुर ने दीप प्रज्ज्वलन कर की। विशेषज्ञ डॉक्टर्स ने प्रकृति के साथ चिकित्सा पद्धति अपनाकर निस्वार्थ भाव से सेवा करने पर बल दिया। कॉन्फ्रेंस में नई वैज्ञानिक चिकित्सा, सीपीआर और चिकित्सीय ज्ञान के अपडेट जैसे सत्रों में विशेषज्ञ जानकारी दे रहे हैं। आईएमए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बी.एम. शरणागत ने बताया कि आईएमए की स्थापना एक छोटे पौधे के रूप में हुई थी, जो अब एक वटवृक्ष बन गया है। उन्होंने कहा कि आईएमए सरकार और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करता है और डॉक्टरों की हर मुश्किल में उनके साथ खड़ा रहता है। कोरोना काल हो या पतंजलि का मामला, आईएमए ने हर जगह अपनी भूमिका साबित की है। जिले के वारासिवनी स्थित एक मलय फार्म में 3 अक्टूबर से शुरू हुई यह कॉन्फ्रेंस 6 अक्टूबर को समाप्त होगी। कॉन्फ्रेंस में डॉ. अर्चना शुक्ला, जिला अध्यक्ष डॉ. प्रवीण ज्योतिषी सहित पूरे प्रदेश से आए चिकित्सक मौजूद हैं।

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