बालाघाट में शनिवार को ‘परमात्मा एक सेवक’ सम्मेलन हुआ। इसमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों से 10 हजार से अधिक सेवकों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के माध्यम से महान त्यागी बाबा जुमदेव जी को उनके सामाजिक कार्यों के लिए भारत रत्न दिए जाने की मांग उठाई गई। सेवकों ने बाबा जुमदेव के लिए की भारत रत्न की मांग यह सम्मेलन परमपूज्य परमात्मा एक सेवक मंडल द्वारा मानव धर्म सेवक सम्मेलन और सामूहिक हवन के रूप में आयोजित किया गया था। सेवकों का मानना है कि बाबा जुमदेव जी ने जीवन भर मानव जागृति के लिए काम किया, जिसके लिए उन्हें यह सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए। सम्मेलन के लिए सेवक एक दिन पहले से ही बालाघाट में जुटना शुरू हो गए थे। कार्यक्रम में सामूहिक हवन, रैली और शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसके बाद मंचीय कार्यक्रम की शुरुआत हुई। बाबा जुमदेव की प्रतिमा का हुआ उद्घाटन कार्यक्रम में सांसद भारती पारधी, देवराज तुमसरे और मार्गदर्शक राउत सहित सेवक मंडल के संचालक, मार्गदर्शक और अन्य सेवकों ने हिस्सा लिया। दोपहर 12 बजे भगवान बाबा हनुमानजी और महान त्यागी बाबा जुमदेव की प्रतिमा का उद्घाटन किया गया। मंचीय कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और अतिथि सत्कार के साथ हुआ। सभी वक्ताओं ने बाबा जुमदेव और परमात्मा एक सेवक मंडल द्वारा मानव जागृति में किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डाला। नागपुर से आए संचालक महेंद्रसिंह गुरबेले ने बताया कि बाबा जुमदेव जी ने अंधश्रद्धा निर्मूलन, जाति बंधन समाप्त करने और व्यसन मुक्त समाज बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। संचालक बोले-बाबा जुमदेव इतने महान की उनके सामने भारत रत्न भी फीका गुरबेले ने कहा कि बाबा जुमदेव जी के मानव सेवा के कार्य इतने महान हैं कि उनके सामने भारत रत्न भी फीका पड़ेगा। उन्होंने जोर दिया कि मानव को जागृत कर समाज में बदलाव लाने वाले महान त्यागी बाबा जुमदेव को भारत रत्न अवश्य मिलना चाहिए। परमपूज्य परमात्मा एक सेवक मंडल उनके कार्यों को समाज में आगे बढ़ा रहा है।


