बाल विवाह मुक्त भारत के एक वर्ष पूरे होने पर ‘100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान’ देश भर में शुरू किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य बच्चों के खिलाफ सदियों पुराने बाल विवाह के अपराध को समाप्त करना है। संस्था ने इसके लिए एक लक्षित रणनीति तय की है, जिसमें स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों, विवाह में सेवाएं देने वाले पेशेवर सेवा प्रदाताओं और पंचायतों व नगरपालिका वार्डों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस अभियान से जुड़े 250 से अधिक सहयोगी संगठन देश के 451 जिलों में बाल विवाह के खात्मे के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। पिछले एक वर्ष में इस नेटवर्क ने देश में एक लाख से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं। सहायता करने वालों को हो सकती है सजा ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर पुरानी बस्ती में होलिस्टिक एक्शन रिसर्च एंड डेवलपमेंट (हार्ड) संस्था ने जनसमुदाय को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के बारे में जागरूक किया। उन्हें समझाया गया कि कानून के अनुसार, बाल विवाह में किसी भी तरह से शामिल होने या सहायता करने वालों को सजा हो सकती है। इसमें शादी में आए मेहमान, कैटरर्स, टेंट वाले, बैंड वाले, सजावट वाले या बाल विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहित, सभी इस अपराध को बढ़ावा देने के जुर्म में दोषी माने जाएंगे। तीन चरणों में कार्यक्रम सौ दिन के इस गहन जागरूकता अभियान को तीन चरणों में बांटा गया है। इसका पहला चरण 31 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में जागरूकता फैलाने पर जोर रहेगा। एक जनवरी से 31 जनवरी के बीच दूसरे चरण में मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे जैसे धार्मिक स्थलों, बैंक्वेट हॉल और बैंड वालों जैसे विवाह में सेवाएं देने वालों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। तीसरा और आखिरी चरण 8 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर समाप्त होगा, जिसमें ग्राम पंचायतों, नगरपालिका के वार्डों और समुदाय स्तरीय भागीदारी पर प्रमुखता से ध्यान दिया जाएगा।


