बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स) पिलानी ने अपने परिसर में असहाय कुत्तों के प्रबंधन के लिए एक व्यापक पहल शुरू की है। यह कदम पिछले दो वर्षों में कुत्तों के काटने के 282 मामलों के बाद उठाया गया है, जिसका उद्देश्य परिसर की सुरक्षा बढ़ाना और पशु कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाना है। इस पहल के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इनमें बड़े पैमाने पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान शामिल हैं। अब तक 144 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है, उन्हें रैबीज का टीका लगाया गया है और माइक्रोचिप भी लगाई गई है। यह कार्य जयपुर स्थित ‘हेल्प इन सफरिंग’ संस्था के सहयोग से किया गया है। परिसर में 19,000 वर्ग फीट का एक पशु आश्रय (एनिमल सेंचुरी) भी स्थापित किया गया है, जहाँ छोड़े गए और घायल जानवरों की देखभाल की जाती है। इस आश्रय में पशु चिकित्सा टीम और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। सुधारों में नौ निर्धारित फीडिंग ज़ोन, एक स्पष्ट घटना रिपोर्टिंग प्रणाली और व्यवस्थित स्वच्छता व सुरक्षा नियम भी शामिल हैं। बिट्स पिलानी की नीतियां अब राष्ट्रीय नियमों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ‘फाइव फ्रीडम्स ऑफ एनिमल वेलफेयर’ के अनुरूप हैं, जो संस्थान के सभी परिसरों में लागू होंगी। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। परिसर में कुत्तों के काटने की घटनाओं में कमी आई है और स्वच्छता में भी सुधार हुआ है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, हाल ही में इन कार्यों की जाँच दो सरकारी समितियों द्वारा की गई। इन समितियों को राजस्थान सरकार के पशुपालन विभाग और झुंझुनूं जिला प्रशासन ने नियुक्त किया था। पहली समिति ने 3 सितंबर 2025 को अचानक निरीक्षण किया, जिसके बाद दूसरी समिति ने 6 सितंबर 2025 को औचक निरीक्षण किया। दोनों समितियों ने अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी है। बिट्स पिलानी ने स्वीकार किया है कि असहाय कुत्तों का प्रबंधन पूरे भारत में एक जटिल मुद्दा है, जिसका त्वरित समाधान संभव नहीं है। यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें सीखने और सुधार करने की आवश्यकता होती है। संस्थान का लक्ष्य है कि परिसर में प्रत्येक व्यक्ति सुरक्षित रहे और प्रत्येक जानवर को सम्मान तथा उचित देखभाल मिले।


