छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में भालू की संदिग्ध मौत के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। वन मंडल अधिकारी ने दो वनरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए वनरक्षकों में विशेखा नाग और दरेन कुमार पटेल शामिल हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने अपने स्तर पर भालू के शव को दफना दिया। संदिग्ध परिस्थितियों में भालू के शव को फिर निकाला गया जिसमें उसके चारों पंजे कटे मिले थे। उच्च अधिकारियों को सूचित किए बिना शव को दफनाया यह घटना 24 फरवरी को आंदोलन जलाशय के पास हुई थी। वनरक्षकों ने न तो पंचनामा किया और न ही पोस्टमार्टम कराया। उच्च अधिकारियों को सूचित किए बिना ही शव को दफना दिया गया। बालोद जिला मुख्यालय से 31 किमी दूर कल्लूबाहरा (घोटिया) के जंगल में वन विभाग ने जब खुदाई की तो भालू का शव मिला। इसके बाद नियमानुसार शव के सैंपल लेकर दाह संस्कार किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया था। प्रारंभिक जांच में वनरक्षकों की लापरवाही सामने आई। प्रदेश स्तर पर होगी जांच दोनों वनरक्षकों को सिविल सेवा आचरण अधिनियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9 के तहत उन्हें निलंबित कर दिया गया। यह मामला प्रदेश स्तर तक पहुंच गया है। जिले से जांच रिपोर्ट मांगी गई है और प्रदेश की टीम भी जल्द ही जांच कर सकती है।


