हेरिटेज निगम में निराश्रित पशुओं को पकड़ कर गो पुनर्वास केंद्र हिंगोनिया पहुंचाने के कार्य में लापरवाही बरतने वाली फर्म ही ग्रेटर निगम ने बिना टेंडर काम कर रही है। चौंकाने वाली बात ये है कि फर्म को 27 सितंबर को एक महीने का वर्कऑर्डर दे दिया था, लेकिन फर्म अब तक काम कर रही है। वर्कऑर्डर तत्कालीन उपायुक्त रजनी माझीवाल ने इसमें 21 सितंबर से एक महीने अथवा नवीन निविदा कार्यादेश (जो भी पहले हो) तक का वर्कऑर्डर दिया था। मैसर्स राजेश ठेकेदार का एक महीने का वह कार्यादेश 21 अक्टूबर को ही समाप्त हो गया। इसके बावजूद बिना टेंडर के फर्म निराश्रित पशुओं को पकड़ने का कार्य कर रही है। बता दें कि हाई कोर्ट कैटल फ्री सिटी बनाने को लेकर कई बार सरकार और नगर निगमों से जवाब मांग चुका है मगर पशु पकड़ने के काम में लापरवाही जारी रहती है। मामला मेरी जानकारी में नहीं है। मैं दिखवाती हूं कि बिना टेंडर के कैसे वर्कआॅर्डर दिया गया और एक महीने बाद भी फर्म कैसे काम कर रही है।
– रुक्मणि रियाड़, आयुक्त ग्रेटर नगर निगम हेरिटेज ने शर्तों का उल्लंघन करने का दिया नोटिस हेरिटेज निगम में निराश्रित पशुओं को पकड़ने और अवैध पशु डेयरियों को हटवाकर गो-पुनर्वास केंद्र हिंगोनिया पहुंचाने के कार्य फर्म मैसर्स राजेश ठेकेदार को गत 27 अगस्त को दिया था, लेकिन फर्म ने टेंडर की शर्तों के अनुसार कार्य ही नहीं किया। टेंडर शर्तों में 4 काउकैचर वाहन और दो ट्रैक्टर मय हाइड्रोलिक ट्रॉली सहित अन्य संस्थान उपलब्ध कराए जाने थे, लेकिन सिर्फ एक ही काउकैचर उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, पकड़े गए पशुओं को गो-पुनर्वास केंद्र हिंगोनिया पहुंचाना था, लेकिन हाइड्रोलिक ट्रॉली की बजाए काउकैचर वाहन से ही पशुओं को उतारा जा रहा है। फर्म पर गोवंश को खुर्द-बुर्द करने का भी आरोप है। टेंडर शर्तों का उल्लंघन करने पर हेरिटेज निगम ने 3 दिसंबर को फर्म को नोटिस भी दिया था। कार्यकाल पूर्ण होने पर भीदे रखा है उपायुक्त का चार्ज उधर, ग्रेटर नगर निगम में पशु प्रबंधन उपायुक्त का पद खाली पड़ा है। पिछले दिनों पशु चिकित्सा विभाग से राइजिंग राजस्थान के लिए दो महीने के लिए डॉ. सुनील कुमार शर्मा का लगाया गया था, उनका कार्यकाल भी पूर्ण हो चुका है। इसके बावजूद डॉ. शर्मा को पशु चिकित्सा अधिकारी के पद के विपरीत पशु प्रबंधन शाखा ग्रेटर में उपायुक्त का चार्ज दे रखा है।


