कटनी जिले के बड़वारा विकासखंड अंतर्गत बसारी संकुल में शिक्षा विभाग के भीतर करोड़ों रुपए के अर्जित अवकाश (Earned Leave) घोटाले का मामला गरमा गया है। ग्राम रोहनिया निवासी राघवेंद्र सिंह ने इस संबंध में कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता राघवेंद्र सिंह का सीधा आरोप है कि बसारी संकुल के प्राचार्य जवाहर लाल बुनकर, सहायक ग्रेड-3 राजकमल बंशकार और बीईओ कार्यालय के बाबू नरेंद्र चौधरी ने आपस में मिलीभगत कर इस गड़बड़ी को अंजाम दिया है। आरोप है कि बिना किसी ठोस आधार और सक्षम अधिकारी की अनुमति के, अपात्र शिक्षकों के बैंक खातों में अर्जित अवकाश के बदले नकद राशि का भुगतान कर दिया गया। 10 साल से पैरालिसिस के मरीज के नाम पर भी निकाली राशि शिकायत में चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। बसारी संकुल में पदस्थ रहे स्वर्गीय नारायण सिंह मरावी, जो पिछले 10 वर्षों से पैरालिसिस (लकवा) से ग्रसित थे, उनके नाम पर भी अर्जित अवकाश की राशि निकाली गई। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जो शिक्षक शारीरिक अक्षमता के कारण स्कूल आने और कार्य करने में ही असमर्थ थे, उन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश में कार्य करने के बदले मिलने वाले ‘अर्जित अवकाश’ का लाभ आखिर कैसे दिया जा सकता है? नियमों को दरकिनार कर निकाली गई राशि शिकायत पत्र में वित्त विभाग के ज्ञापन (13/08/2008) और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भोपाल के पत्र (20/04/2016) का हवाला दिया गया है। इन नियमों के अनुसार, एक साल में 15 दिनों के अर्जित अवकाश की मंजूरी देने के लिए केवल जिला कलेक्टर ही सक्षम अधिकारी हैं। आरोप है कि बसारी संकुल में कलेक्टर की अनुमति और उपयोगिता प्रमाण पत्र के बिना ही गुपचुप तरीके से सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए निकाले गए हैं।


