बिना बजट के शिक्षा विभाग:10 जिलों में हाई स्कूल शिक्षकों को 6 माह से वेतन नहीं, 161 शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन के 6.18 करोड़ रुपए बकाया

झारखंड का शिक्षा विभाग गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। विभाग के पास शिक्षकों को वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं। 10 जिलों के 68 उत्क्रमित (अपग्रेडेड) हाई स्कूलों के 161 शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले छह महीने से वेतन नहीं मिला है। इनके 6.18 करोड़ रुपए बकाया वेतन का भुगतान कब तक होगा, अधिकारी स्पष्ट रूप से यह भी नहीं बता पा रहे हैं। फंड की कमी का असर सिर्फ वेतन पर ही नहीं पड़ा रहा है। पैसों की कमी के कारण बच्चों की पोशाक योजना और स्कूल किट योजना भी प्रभावित हुई है। सत्र बीतने वाला है, लेकिन बच्चों को ड्रेस नहीं मिली है। कई स्कूलों में तो हैंड वॉश और सफाई जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। 2016-17 में अपग्रेड हुए थे 189 स्कूल वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य सरकार ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में माध्यमिक शिक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए 189 स्कूलों को अपग्रेड किया था। इसके बाद 2022-23 में इन स्कूलों में पदों का सृजन कर शिक्षकों को पदस्थापित किया गया। लेकिन इनके वेतन भुगतान की स्थाई व्यवस्था नहीं की गई। वर्ष 2025-26 में योजना मद के लिए पर्याप्त आवंटन नहीं मिला और अनुपूरक बजट में भी राशि स्वीकृत नहीं हुई। इसी कारण वेतन का भुगतान अटक गया। ये योजनाएं भी बेपटरी… पोशाक योजना: प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के बच्चों के लिए पोशाक योजना चल रही है। लेकिन चालू वितीय वर्ष में कई जिलों को इसकी राशि नहीं मिली। नतीजा यह है कि हजारों बच्चों को बिना ​ड्रेस या पुरानी ड्रेस में स्कूल आना पड़ता है। या फिर अभिभावकों को अपनी जेब से ड्रेस पर खर्च करना पड़ता है। शिक्षकों का कहना है कि इससे बच्चों की उपस्थिति और आत्मविश्वास, दोनों प्रभावित हो रहे हैं। स्कूल किट: सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए लागू स्कूल किट योजना भी अधूरी है। योजना के तहत बच्चों को कॉपी, पेन, पेंसिल समेत अन्य शैक्षणिक सामग्री दी जानी थी। लेकिन बच्चों को अब तक यह किट नहीं मिली। इसके बिना पढ़ाई कराना शिक्षकों के लिए चुनौती बन गया है। इससे बच्चों की सीखने की प्रक्रिया बाधित हो रही है। विकास अनुदान: विद्यालयों के रोजमर्रा संचालन के लिए मिलने वाला अनुदान भी लंबे समय से नहीं मिला है। इसी राशि से हैंडवॉश, साबुन, साफ-सफाई, पेयजल और छोटे रखरखाव के कार्य होते हैं। इस मद में अनुदान नहीं मिलने से स्कूलों में स्वच्छता व्यवस्था चरमरा गई है। इससे स्कूली बच्चों के बीमार पड़ने का खतरा बढ़ गया है।

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