बिना वाइब्रेटर के पिलर ढलाई के कारण नदी पर बन रहे पुल का काम बंद कराया

भास्कर न्यूज|गुमला चैनपुर प्रखंड मुख्यालय से 35 किमी दूर जनावल पंचायत के राजा डेरा गांव में शंख नदी पर बन रहे पुल निर्माण में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। लगभग 4.5 करोड़ रुपए की लागत से बन रही इस महत्वकांक्षी योजना में संवेदक द्वारा गुणवत्ता को ताक पर रखकर काम किया जा रहा था। ग्रामीणों की शिकायत पर गुमला विधायक भूषण तिर्की के निर्देश के बाद झामुमो कार्यकर्ताओं ने निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। मिली जानकारी के अनुसार शंख नदी पर पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। इसकी गुणवत्ता को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने विधायक भूषण तिर्की से शिकायत की थी। विधायक के निर्देश पर शुक्रवार को जमीनी हकीकत परखने के लिए झामुमो केंद्रीय समिति के सदस्य सुशील दीपक मिंज और झामुमो कार्यकर्ता सह बेंदोरा पंचायत के मुखिया दीपक खलखो स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि पुल के पिलर की ढलाई बिना वाइब्रेटर चलाए ही नहीं जा रही थी जो निर्माण के तकनीकी मानकों का खुला उल्लंघन है। जब निरीक्षण टीम ने मौके पर मौजूद मुंशी सोनू कुमार से इस बाबत सवाल किया तो उसने बेतुका तर्क देते हुए कहा कि वाइब्रेटर खराब हो गया है व उसे बनने के लिए भेजा गया है इसलिए इसके बिना ही ढलाई की जा रही है। कार्यकर्ताओं द्वारा वस्तुस्थिति की जानकारी मिलते ही विधायक भूषण तिर्की ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संवेदक को काम रोकने का आदेश दिया। विधायक भूषण तिर्की ने कहा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में चल रही किसी भी विकास योजना में भ्रष्टाचार और गुणवत्ता से समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भ्रष्टाचार के कारण ही सरकारी राशि की बंदरबांट होती है और करोड़ों की लागत से बनी योजनाएं समय से पहले ही धराशाई हो जाती हैं। गुणवत्ता सुनिश्चित होने के बाद ही काम आगे बढ़ेगा। इस पुल के निर्माण से राजाडेरा, नवाटोली, छिछवानी, नवगई, सिरसी, पुटरूंगी, अकासी और पकरी टोली सहित कई गांवों की तकदीर बदलने वाली है। ग्रामीण तरबेला लकड़ा, निर्मला उरांव, राजेंद्र उरांव, शोभा चोराठ और प्रतिमा एक्का ने बताया कि वे वर्षों से इस पुल का इंतजार कर रहे थे। ग्रामीणों ने कहा की इस पुल के बन जाने से चैनपुर मुख्यालय की दूरी 35 किलोमीटर से घटकर 25 किलोमीटर रह जाएगी। जिससे हमें 10 किलोमीटर से अधिक की बचत होगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम घटिया निर्माण बर्दाश्त करेंगे। हमें पुल चाहिए लेकिन वह मजबूत और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। फिलहाल विधायक के हस्तक्षेप के बाद निर्माण कार्य रुका हुआ है और संवेदक को गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने की चेतावनी दी गई है। इंजीनियर उमेश कुमार ने कहा कि मैं अभी बाहर हूं, पुल की प्राक्कलित राशि लगभग 4 करोड़ 50 लाख रुपए है। बिना वाइब्रेटर का ढलाई की जा रही है तो यह सरासर गलत। गुणवत्तापूर्ण कार्य करने का संवेदक को निर्देश दिया गया है। इसकी जांच की जाएगी।

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