साइबर ठग अब लोगों के बैंक अकाउंट खाली करने के लिए आरटीओ के फर्जी ई-चालान का एपीके फार्मेट फाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं। बिलासपुर में स्वास्थ्य कर्मी को ऐसे ही ई-चालान का एपीके फाइल भेजकर उनके खाते से 5 लाख 199 रुपए ट्रांसफर कर लिया। स्वास्थ्य कर्मी ने आरटीओ का ई-चालान देखकर लिंक टक किया। फिर महज पांच मिनट में उनका अकाउंट खाली हो गया। मामला सकरी थाना क्षेत्र का है। मोबाइल हैक करने के बाद ठग भेजते हैं एपीके फाइल
दरअसल, सायबर ठग इन दिनों तरह-तरह से ठगी का तरीका अपना रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से ठग मोबाइल नंबर को हैक कर लेते हैं, जिसके माध्यम से मोबाइल के वाट्सऐप ग्रुप और पर्सनल कांटैक्ट पर लोगों को रजिस्टर्ड मोबाइलधारक के नाम से आरटीओ ई-चालान का का एपीके फाइल भेजते हैं, जिसे टच करते ही बिना कोड शेयर किए, बैंक अकाउंट खाली कर दिया जाता है। पिछले दिनों यातायात पुलिस के जवान का मोबाइल हैक कर इस तरह से ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिसकर्मी के नंबर से भेजे गए मेसेज को देखकर उनके परिचितों ने जैसे ही एपीके फाइल टच किया, उनके अकाउंट खाली हो गए। उनके मोबाइल नंबर से करीब दर्जन भर लोग ठगी का शिकार हो गए। आरटीओ का ई-चालान देखकर टच किया लिंक
उसलापुर के आनंद नगर निवासी स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि 3 फरवरी को सुबह 10 बजे उनके वाट्सएप पर एक मैसेज आया। मैसेज भेजने वाले के नंबर की डीपी पर परिवहन विभाग का आधिकारिक लोगो लगा था। मैसेज में पीड़ित की ही मोटरसाइकिल का नंबर लिखा था और दावा किया गया कि उनका चालान कटा है। चालान देखने के लिए नीचे एक एपीके फाइल का लिंक दिया गया था। जैसे ही पीड़ित ने अपनी गाड़ी का नंबर देखकर लिंक पर क्लिक किया, उनका फोन हैक हो गया। अगले 5 मिनट के भीतर यूपीआई के जरिए अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 5,00,199 रुपये खाते से पार कर दिए। जानिए… क्यों खतरनाक है एपीके फाइल
एसीसीयू के साइबर एक्सपर्ट प्रभाकर तिवारी ने बताया कि एपीके फाइल एक तरह का सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन फॉर्मेट है। मोबाइल यूजर्स इसे किसी अनजान लिंक से डाउनलोड करते हैं, तो ठग फोन का पूरा एक्सेस पा लेता हैं। वह मोबाइल मैसेज, फोटो वीडियो समेत आसानी से बिना मोबाइल यूजर्स की जानकारी के उनके एकाउंट खाली कर देता है। एसएसपी बोले- जागरूकता ही बचाव है
एसएसपी रजनेश सिंह ने लोगों से अनजान लिंक से बचने की अपील की है। वाट्सएप पर आए किसी भी अनजान लिंक या फाइल को डाउनलोड न करें। चालान चेक करने के लिए हमेशा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट एम परिवहन का ही उपयोग करें। ठग सरकारी विभागों का ले रहे आड़
ठगी के लिए साइबर ठग तरह-तरह के पैंतरे अपना रहे हैं। वे सरकारी विभागों का नाम, फार्मेट की हूबहू नकल कर ठगी के लिए उनका इस्तेमाल कर रहे है। एआई आने के बाद लोग दस्तावेजों की कॉपी, सरकार के फार्मेट तक कॉपी करने लगे हैं। किसी को भी यदि इस तरह का संदिग्ध लिंक या नकल मिलने पर वे तुरंत इसकी सूचना साइबर सेल को दे सकते हैं।


