बिलासपुर की यह घटना न सिर्फ झकझोर देने वाली है, बल्कि कई सवाल उठाने वाली है। 14 साल के नाबालिग ने 4 साल की मासूम से दुष्कर्म की कोशिश की। बच्ची ने विरोध किया तो सिर पर ईंट और लकड़ी के बत्ते से वार कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने नाबालिग को पकड़ा और मोबाइल की जांच की तो पोर्न फिल्में देखने की हिस्ट्री मिली है। स्तब्ध कर देने वाली इस घटना को प्रकाशित करने में भास्कर ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को ऊपर रखा है। इस खबर के जरिए हम इस डिजिटल दौर में इंटरनेट के जरिए अश्लील कंटेंट से बच्चों की बदलती मानसिकता को भी सामने रखना चाहते हैं, क्योंकि जो बच्ची मारी गई, वह तो अबोध थी ही और जिसने ये कृत्य किया उसमें मानसिक विकार नजर आ रहा है। बताया गया है कि निर्माणाधीन कॉलोनी में बन रहे एक मकान की छत पर मंगलवार की सुबह एक मजदूर को बच्ची की लाश नजर आई। चारों तरफ खून था। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। एसपी रजनेश सिंह भी पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। फोरेंसिक एक्सपर्ट को भी बुलाया गया। टीम ने मौके से सबूत जुटाए। एसीसीयू, फोरेंसिक व स्निफर डॉग की टीम भी वहां आई। पुलिस की एक टीम सीसीटीवी फुटेज की जांच में जुट गई। प्रारंभिक पूछताछ के बाद पुलिस को कॉलोनी में काम करने वाले 9 मजदूरों व उनके रिश्तेदारों पर शक हुआ। सभी से पूछताछ की गई। इस दौरान स्निफर डॉग घटना स्थल से जवान को सीधे बच्ची के पड़ोसी के घर ले गया। सीसीटीवी फुटेज की जांच में जुटी टीम को उसी साइट पर मजदूर का 14 साल का बेटा नजर आया, जो शाम को मासूम को घटना स्थल की तरफ ले जाते दिखा। पुलिस ने जब उसे पकड़ा, तब उसके पैर पर खून के निशान थे। पुलिस को बच्ची के पिता ने बताया कि सोमवार की शाम 6 बजे वह चॉकलेट लेने गई थी। उसके नहीं लौटने पर उसकी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिली। बिलासपुर ही नहीं देश में ऐसी शर्मनाक घटनाएं सुप्रीम कोर्ट जता चुका चिंता – सुप्रीम कोर्ट ने इसी महीने की शुरुआत में कहा था कि देश में नाबालिगों के अपराधों को निपटाने के लिए जुवनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 बनाया गया है। इस कानून का उद्देश्य यह तय करना है कि जिन बच्चों पर अपराध का आरोप है, उन्हें उचित न्याय मिले और उनके सुधार पर ध्यान दिया जाए। लेकिन जब 16 से 18 वर्ष के बीच के किशोर जघन्य अपराध करते हैं, तो कानून इस बात की अनुमति देता है कि यह जांच की जाए कि उन्हें वयस्क की तरह मुकदमे का सामना करना चाहिए या नहीं। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. संदीप शुक्ला, मनोवैज्ञानिक बच्चे मोबाइल में क्या देख रहे, उसकी निगरानी करें
सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अश्लील कंटेंट परोसा जा रहा है। सेंसरशिप नहीं होने के कारण बच्चे भी बेरोकटोक यह सब देख रहे हैं। इसका बच्चों की मानसिकता पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। जिस तरह की भाषा का उपयोग वहां हो रहा है, बच्चे भी उसी तरह की भाषा बोल रहे हैं। बच्चों व किशोरों के ऐसे अपराधों में शामिल होने के पीछे ये कंटेंट बड़ी वजह हैं। पैरेंट्स का यह दायित्व है कि बच्चे मोबाइल में क्या देख रहे हैं, उस पर नजर रखें। उनसे बातचीत करें। बच्चियों को गुड टच और बेड टच के बारे में बताएं क्योंकि शोषण के ज्यादातर मामलों में यह देखा गया है कि आरोपी करीबी या जान-पहचान वाले होते हैं। बच्चों को गुड टच, बेड टच के बारे में बताएं
घरवाले बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। 15-17 साल के बच्चों से मिलने जुलने वालों को देखें और उनसे बातचीत करें। खासकर छोटी बच्चियों को कभी भी अकेला न छोड़ें या किसी के साथ जाने न दें। उन्हें गुड व बेड टच के बारे में जानकारी दें।
– रजनेश सिंह, एसपी डरा रहे आंकड़े: अपराधों में नाबालिगों के शामिल होने के केस बढ़े बिलासपुर में कुछ सालों में जिस तरह क्राइम का ग्राफ बढ़ रहा है, उससे भी अधिक चौंकाने वाली जानकारी नाबालिगों के गंभीर अपराध में शामिल होने की है। 2021 से 2024 तक 4 साल में दुष्कर्म के 36, हत्या के 15 हत्या के प्रयास के 44 और चाकूबाजी की 34 वारदात सहित 196 घटनाओं में नाबालिग शामिल रहे। बलवा व मारपीट के 64 केस में आरोपी बने। दिनभर की आपराधिक घटनाओं में किसी न किसी में नाबालिग जरूर शामिल होता है। दुष्कर्म के 85% मामलों में आरोपी जान पहचान वाला ही: जिले में चार साल के भीतर दुष्कर्म के 36 केस हुए। इनमें से 30 केस यानि 85 फीसदी लोग जान पहचान वाले ही थे। कोई परिवार के सदस्य था था कोई पड़ोसी या रिश्तेदार शामिल थे।


