बिलासपुर में युवक को झूठे केस में फंसाया…FIR निरस्त:हाईकोर्ट बोला-पुलिस की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण, खुद पैरवी कर युवक कहा-भू-माफिया से मिलीभगत कर रची गई साजिश

बिलासपुर में पुलिस ने एक युवक पर झूठी एफआईआर दर्ज कर उसे कानूनी उलझन में फंसा दिया। युवक ने अपने खिलाफ दर्ज केस को हाईकोर्ट में चुनौती दी। जिसमें उसने खुद पैरवी की और कहा कि पुलिस ने भू-माफिया के साथ मिलकर उसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने याचिका को मंजूर करते हुए कहा कि, पुलिस की कार्रवाई दुर्भावना पूर्ण है, जिसे जारी रखना कानून का दुरुपयोग होगा। हाईकोर्ट ने युवक पर दर्ज दोनों एफआईआर को निरस्त करने का आदेश दिया है। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, दयालबंद निवासी पीयूष गंगवानी के खिलाफ पुलिस ने दो अलग-अलग केस दर्ज किया है। इसमें पहला केस मई-जून 2022 का है। तारबाहर थाने में युवक पर महादेव सट्‌टा ऐप चलाने के लिए फर्जी कंपनी बनाने का आरोप लगाकर धोखाधड़ी, सट्‌टा एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। यह भी आरोप है कि उसने बैंक कर्मचारी जय दुबे के साथ मिलकर म्यूल अकाउंट खोला है। वहीं, दूसरा मामले में इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी बनाकर आपत्तिजनक और अश्लील तस्वीर भेजना और धमकाने का आरोप है। इसमें आईपी एड्रेस के आधार पर उसे आरोपी बनाया गया। पुलिस की झूठी और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के खिलाफ पुलिस ने क्रिमिनल अपील पेश की। इसमें पुलिस की एफआईआर को चुनौती देते हुए कहा कि बिना साक्ष्य और ठोस गवाह के उसे आरोपी बनाया गया है। याचिका में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने का आग्रह किया। युवक ने खुद की अपनी पैरवी, कहा- झूठे केस में फंसाया इस मामले के आरोपी और याचिकाकर्ता पीयूष गंगवानी ने खुद अपनी पैरवी करते हुए तर्क रखा। उसने बताया कि पुलिस ने महादेव सट्‌टा ऐप चलाने के लिए फर्जी आईडी बनाने का आरोप लगाया है। इस मामले में क्षितिज भारद्वाज सहित अन्य युवकों पर बैंक कर्मी जय दुबे के साथ मिलकर म्यूल अकांउट खुलवाने और उसमें पैसे जमा कराने का आरोप है। पुलिस ने इस केस में आरोपी क्षितिज के बयान के आधार पर याचिकाकर्ता को आरोपी बना दिया। जबकि, इस मामले में सीधे तौर पर उसे कोई लेनादेना नहीं है। याचिकाकर्ता ने अपने बचाव में कई साक्ष्य और तर्क भी प्रस्तुत किए। वहीं, इंस्टाग्राम केस में भी बिना साक्ष्य के आरोपी बनाने का आरोप लगाया है। मिलीभगत कर भू-माफिया ने फंसाया याचिकाकर्ता पीयूष का यह भी आरोप है कि भू-माफिया नरेंद्र मोटवानी, शिकायतकर्ता अभय सिंह राठौर ने पुलिस अफसरों से मिलीभगत कर उसे आपराधिक केस में फंसाया है। उसने कोर्ट को बताया कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने भू-माफिया नरेंद्र मोटवानी के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किया और फर्जी हस्ताक्षर फर्जी रिकार्ड तैयार किया है। उसने बताया कि नरेंद्र के साथ उसका संपत्ति संबंधी विवाद है, जिस पर नरेंद्र मोटवानी ने उसकी पैतृक संपत्ति को हड़पने की कोशिश की थी। शासन ने याचिकाकर्ता के आरोपों को बताया झूठा इस मामले की सुनवाई के दौरान शासन की तरफ से कहा गया कि, मिलीभगत कर याचिकाकर्ता को फंसाने का आरोप निराधार है। प्रथम दृष्टया साक्ष्य के आधार पर कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। शासन ने कहा कि सिविल विवाद का बहाना कर वो आपराधिक दायित्व से नहीं बच सकता। वहीं, नरेंद्र मोटवानी की तरफ से कहा गया कि उसे बदनाम करने के लिए झूठा आरोप लगाया जा रहा है। याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज केस में न तो वह पीड़ित है और न ही गवाह। न ही पुलिस की कार्रवाई में उसकी भूमिका रही है। हाईकोर्ट बोला- यह दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई है हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि, याचिकाकर्ता पर दुर्भावनापूर्वक कार्रवाई की गई है, जिसमें प्रक्रियात्मक गड़बड़ियां की गई है। उसके खिलाफ एफआईआर बिना साक्ष्य पर आधारित है। ऐसे में याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक प्रकरण जारी रखने की अनुमति देन कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए एफआईआर निरस्त करने का आदेश दिया है।

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