बीकानेर विकास प्राधिकरण विकसित हो चुकी कॉलोनियों को नगर निगम को हस्तांतरित करने के लिए राजी तो हुआ, मगर प्रमुख दो कॉलोनियां फिर भी अपने पास रख रहा है। इसमें पॉश कॉलोनी मानी जाने वाली करणी नगर और मुरलीधर व्यास कॉलोनी शामिल हैं। इन दोनों को वो निगम को नहीं दे रहा। इसके अलावा कॉलोनियों के हस्तांतरण के बाद निगम को आय तो दिखाई दे रही है, मगर हर साल करीब 50 करोड़ रुपए की सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी भी आएगी। कॉलोनियां निगम के पास आईं तो सड़कों को लेकर शिकायतें बढ़नी तय है। नगर निगम और बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) के बीच कॉलोनियों के हस्तांतरण का विवाद लंबे समय से चल रहा है। नगर निगम कॉलोनियां तो लेने को तैयार है, मगर पूर्ण विकसित। पूर्व मेयर से लेकर तमाम आयुक्त इस बात को लेकर प्रस्ताव यूआईटी को देते रहे, मगर बात नहीं बनी। अब कुछ हद तक बात तो बनी, मगर इसमें भी बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) ने अपनी चाल चली। करणी नगर 90 प्रतिशत विकसित कॉलोनी है, फिर भी वो उसे छोड़ने को तैयार नहीं है। मुरलीधर व्यास कॉलोनी भी लगभग विकसित है, मगर वो कॉलोनी भी निगम को नहीं सौंपी जा रही। सफाई, सीवरेज और कचरा कलेक्शन पहले से 80 वार्डों में निगम के पास बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) नगर निगम को कॉलोनियां सौंपकर सड़कों की लाइबिलिटी बढ़ा रहा है। जबकि इन कॉलोनियों में सफाई, सीवरेज, कचरा कलेक्शन और रोड लाइटों की जिम्मेदारी पहले से ही संभाल रहा है। इसके बाद अब असली भार सड़कों का आएगा। एक अनुमान के तहत हर साल करीब 50 करोड़ रुपए की मुख्य सड़कों से लेकर गलियों की सड़कें बनाने की जिम्मेदारी भी निगम पर ही होगी। मौजूदा हालत में पुरानी गिन्नाणी हो या हनुमान हत्था या कोई और कॉलोनी, निगम वहीं सड़कें बना पाता है जहां पावरफुल लोग हों। बिना सिफारिश कॉमन सड़कें नहीं बनतीं। अभी भी अधिकांश कॉलोनियों में ना तो सड़कें हैं ना ही नालियां। ऐसे में 50 करोड़ हर साल जुटाना निगम के लिए चुनौती होगी। जस्सूसर और नत्थूसर गेट के बाहर, गोपेश्वर बस्ती, पूरा गंगाशहर, समता नगर, वल्लभ गार्डन, शास्त्री नगर, पवनपुरी, शार्दूल गंज समेत करीब 30 से ज्यादा कॉलोनियां निगम को मिलेंगी। बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) के पास अभी भी करणी नगर, मरुधर कॉलोनी, स्वर्ण जयंती, अशोक नगर, शौकत उस्मानी नगर समेत एक दर्जन से ज्यादा कॉलोनियां रहेंगी। जेएनवी में करीब 20 भूखंड मिलेंगे, पुरानी जेल निगम को क्यों नहीं: बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) की कुछ कॉलोनियों में सीमित भूखंड हैं। जयनारायण व्यास कॉलोनी में सिर्फ 20 भूखंड ही बचे हैं जिनको बेचकर निगम कमाई कर सकता है। बड़ा सवाल पुरानी जेल की जमीन पर आ रहा है। जब बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) सारी कॉलोनियां निगम को सौंप रहा है तो पुरानी जेल वाली 200 करोड़ की जमीन निगम को क्यों नहीं दे रहा। इसका निर्णय भी कलेक्टर को निगम के पक्ष में करना चाहिए। अगर पुरानी जेल की जमीन निगम को मिलती है तो निगम की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। जनप्रतिनिधियों को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) के पास अब 42 किमी पैराफेरी इलाका बचा है। वहां से आय कर सकता है, निगम के पास ज्यादा साधन नहीं हैं। “ऐसा मैंने सुना है कि जेल की जमीन यूआईटी से होते हुए बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) के पास पहुंची है। उनके नाम है। पर मैं चेक कराता हूं कि कोई गुंजाइश है मिलने की तो जरूर पैरवी करेंगे। पहले कॉलोनी का रिकॉर्ड डिजिटलाइज्ड होगा ताकि कोई उसमें हेर-फेर न कर सके। लाइबिलिटी बढ़ेगी पर आय भी होगी।” -मयंक मनीष, कमिश्नर, नगर निगम


