दिल्ली में स्थित राज्य सरकार की संपत्ति बीकानेर हाउस कुर्की (अटैचमेंट) आदेश से मुक्त हो गई है। दिल्ली कॉर्मिशियल कोर्ट ने नोखा नगर पालिका के राशि जमा कराने के बाद अपने आदेश को वापस ले लिया है। दरअसल, कोर्ट ने प्रदेश की नोखा नगर पालिका द्वारा मैसर्स एनवायरो इंफ्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड को 50.31 लाख रुपए की मध्यस्थता राशि का भुगतान नहीं करने पर यह आदेश दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने कोर्ट में यह कहते हुए पुर्नविचार याचिका दाखिल की थी कि बीकानेर हाउस नोखा नगर पालिका की संपत्ति नहीं है। वह राज्य सकार के अधीन आती है। ऐसे में नोखा नगर पालिका के मामले में बीकानेर हाउस को अटैच नहीं किया जा सकता हैं। वहीं, नोखा नगर पालिका ने भी कोर्ट में कहा था कि बीकानेर हाउस उसकी संपत्ति नहीं है। नोखा नगर पालिका को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं कॉमर्शियल कोर्ट के आदेश के खिलाफ नोखा नगर पालिका ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए नोखा नगर पालिका को मध्यस्थता राशि जमा कराने के लिए कहा था। नोखा नगर पालिका के राशि जमा कराने के बाद कॉमर्शियल कोर्ट ने बीकानेर हाउस के कुर्की आदेश को वापस ले लिया। वहीं, कंपनी की तरफ से जमा राशि प्राप्त करने के लिए कोर्ट में अर्जी दायर की गई है। सितंबर में दिया था कुर्की आदेश दिल्ली में राजस्थान सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने बताया- कॉमर्शियल कोर्ट ने बिना सरकार का पक्ष सुने सितंबर में एकतरफा कुर्की आदेश जारी किया था। आदेश की जानकारी सामने आने के बाद सरकार ने तुरंत प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया- हमने कॉमर्शियल कोर्ट में रिकॉल एप्लिकेशन दायर करके सरकार का पक्ष सुनने का आग्रह किया। सरकार का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने बीकानेर हाउस की कुर्की आदेश पर रोक लगा दी थी। वहीं अब अदालत ने पूरी तरह से बीकानेर हाउस को कुर्की आदेश से मुक्त कर दिया हैं। बीकानेर हाउस में है सीएम का दफ्तर दरअसल, बीकानेर हाउस दिल्ली में राजस्थान सरकार की ऐतिहासिक इमारत है। इस बिल्डिंग में सीएम भजनलाल शर्मा का भी कार्यालय है। इसके अलावा यहां हाईकोर्ट, पर्यटन, राजस्थान फाउंडेशन, आरएसआरटीसी सहित कई विभागों के कार्यालय संचालित हैं। महाराजा गंगा सिंह ने कराया था निर्माण
बीकानेर हाउस का निर्माण बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह के शासनकाल के दौरान हुआ था। बीकानेर हाउस की स्थापत्य शैली मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान की है। शाही निवास के रूप में उपयोग में होने पर इसके ग्राउंड फ्लोर पर रिसेप्शन सुइट्स, निजी कमरे और अतिथि कमरे थे, जबकि महिलाओं के क्वार्टर, पहली मंजिल पर थे। 1947 में भारतीय स्वतंत्रता के समय, बीकानेर हाउस भारतीय शाही परिवारों के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकों का स्थान था, जहां वो अपने भविष्य पर विचार-विमर्श करते थे। इसे 18 नवंबर 2015 को जनता के लिए खोल दिया गया। अब यह राजस्थान सरकार द्वारा संचालित एक विश्व स्तरीय सांस्कृतिक केंद्र है।


