बीजीय मसाला फसलों की खेती से खुलेगी उन्नति की राह:विदेशों में भी है अच्छी मांग, किसानों ने ली नई तकनीकों की जानकारी

झालावाड़ के किसानों को ‘‘बीजीय मसाला फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकें ’’ विषय पर दो दिवसीय ट्रेनिंग दी गई। राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड, जयपुर की ओर से आयोजित इस ट्रेनिंग का उद्देश्य मसाला उत्पादन बढ़ाने, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, निर्यात को बढ़ावा देना था। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. महेश चौधरी ने बताया कि जिले की अर्द्ध शुष्क जलवायु बीजीय मसाला फसलों के लिए उपयुक्त है। अधिकतर बीजीय मसाला फसलें रबी के मौसम में ही उगाई जाती है, इनको कम पानी एवं उर्वरकों की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि खाने के साथ-साथ सौंदर्य प्रसाधनों और अन्य उद्योगों बीजीय मसालों की खपत दिनो-दिन बढ़ रही है। इसलिए इनका उत्पादन करना आज के समय में फायदेमंद है।
कीट वैज्ञानिक डॉ. टीसी वर्मा ने बीजीय मसाला फसलों में लगने वाले कीटों एवं रोगों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ज्यादा रसायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल से फसल खराब हो जाती है। ये फसलें काफी मात्रा में विदेशों में निर्यात की जाती है, लेकिन गुणवत्ता में कमी आने से इनके एक्सपोर्ट में दिक्कत पैदा हो जाती है। गृह वैज्ञानिक डॉ. तुलिका आचार्य ने बीजीय फसलों के महत्व को बताते हुए कहा कि इन फसलों के मूल्य संवर्धन की भी अपार संभावनाएं है। जो किसान के लिए काफी फायदेमंद है। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. हितेश मुवाल ने जैविक खेती के बारे में अवगत करवाते हुए बताया कि जैविक खेती के तहत रसायनों के स्थान पर जैविक खादों, जैसे वर्मीकंपोस्ट, जीवामृत आदि का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और यह कीटों तथा बीमारियों को भी नियंत्रित करती है। कार्यक्रम में जिले के 50 कृषकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अन्त में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी रखी गई जिसमें 3 सफल कृषक नितेश कुमार, भरत लोधा एवं हरिओम पाटीदार को पुरस्कृत किया।

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