जयपुर| बीमा विशेषज्ञों के मुताबिक, सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए डिजिटल, मानकीकृत और त्वरित क्लेम सेटलमेंट प्रणाली और अपील योग्य फास्ट ट्रैक फ्रेमवर्क लागू करने की जरूरत है, जहां दावाकर्ता को डिजिटल माध्यम से सेटलमेंट का प्रस्ताव मिले और एक सप्ताह में भुगतान हो जाए। ऐसी प्रणाली से परिवारों को समय पर सहायता मिलेगी और अदालती दबाव भी काफी कम होगा। बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड के एमडी और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के चेयरमैन डॉ. तपन सिंघल का कहना है कि देश में हर वर्ष लगभग 5 लाख दुर्घटनाएं होती हैं। हजारों लोगों की जान जाती और लाखों प्रभावित परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसे में क्लेम सेटलमेंट की लंबी प्रक्रिया और न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ प्रभावित परिवारों की समस्या बढ़ा देते है। इसके मद्देनजर सरकार को अपील योग्य फास्ट ट्रैक फ्रेमवर्क लागू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी बड़ी समस्या है। अधिकांश पॉलिसीधारकों को यह नहीं पता कि उनके प्रीमियम का उपयोग कैसे और कितने खर्चों पर होता है। इसलिए यूनिफाइड डिसक्लोजर फ्रेमवर्क हो, जो हर पॉलिसी के लिए कमीशन, जोखिम पूल और व्यय का स्पष्ट विवरण दिखाए। इसके अलावा नेशनल एमएसएमई रिस्क शील्ड का निर्माण और वाणिज्यिक जोखिमों पर 5 करोड़ की सीमा हटानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हाल ही पारित बीमा संशोधन बिल बड़ा कदम साबित हो सकता है। इसके तहत ‘बीमा सुगम’ नामक एक यूनिफाइड डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जो सभी पॉलिसी, क्लेम और कंपनियों की जानकारी एक स्थान पर उपलब्ध कराएगा।


