लुधियाना| बुजुर्ग दादा-दादी ने हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए नन्हे फरिश्ते को अंतिम विदाई दी। इसी के साथ मासूम की लाश का 31 दिनों का इंतजार पूरा हुआ। मंगलवार को भास्कर में छपी खबर के बाद फोकल पॉइंट पुलिस हरकत में आई और मृत बच्चे के परिजनों तक पहुंची। पुलिस ने मोर्चरी से निकलवाकर शव सौंपा और संस्कार करवाया। इस मौके पर भी नवजात का मनहूस मानने वाला पिता बनारसी दास मौजूद नहीं था। देरी से संस्कार के सवाल पर दादी सुशीला चौधरी ने कहा, “मां-बच्चे की मौत से हम अंदर से टूट गए हैं। रिवाज के चलते हम 16 दिन तक नहीं निकले। बनारसी के पहले से तीन बेटे हैं, उन्हें संभालने में समय लगा। ऐसे में देरी हुई।” दादी ने कहा कि दो महीने पहले डिलीवरी होने के कारण नवजात के फेफड़े विकसित नहीं हो पाए थे। आर्टिफिशियल लंग्स पर डेढ़ लाख का खर्च आ रहा था। इतनी रकम नहीं थी, इसलिए सिविल में ही इलाज जारी रखा। इसी कारण नवजात की मौत हुई। डिलीवरी के बाद ठंड लगने से उसकी मां की भी मौत हो गई।


