भास्कर न्यूज|लुधियाना कादियां स्थित तक्षशिला महा बुद्ध विहार में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित धम्मदेसना का श्रवण किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसके बाद भगवान बुद्ध के भजन-कीर्तन से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। बुद्ध ही बुद्ध है, बनते सारे काम, बुद्धा के चरणों में, बुद्धा के चरणों में बसा सुख, सब दुखों से हो जाएं मुक्त, समझ से बढ़कर कोई न उपाय…, ज्ञान का दीपक जलाया बुद्ध ने, अंधकार को दूर किया…,बुद्ध के उपदेशों में पाई शांति, हर विचार में बसी दिव्यता…, शांति की राह पर चलो, बुद्ध की महिमा का गाओ… जैसे भजनों की गूंज ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर भिक्षु दर्शनदीप महाथेरो, भिक्षु प्रज्ञा बोधि थेरो और भिक्षु चन्द्रकीर्ति थेरो ने उपासक-उपासिकाओं को प्रवचन दिए। भिक्षु प्रज्ञा बोधि थेरो ने भगवान बुद्ध के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि करीब 2600 साल पहले कपिलवस्तु के महाराजा शुद्धोधन और महामाया के घर जन्मे सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की उम्र में गृह त्याग कर 6 वर्षों तक कठोर तपस्या की। वैशाख पूर्णिमा के दिन 35 वर्ष की आयु में उन्होंने बुद्धत्व की प्राप्ति की और संसार को दुःख, उसके कारण, निवारण और दुःख दूर करने का मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का जीवन शांति और करुणा का प्रतीक है और आज भी यदि संसार को सुखी बनाने की कोई राह है, तो वह केवल भगवान बुद्ध की शिक्षाओं में ही निहित है। इस मौके पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के चरणों में नमन कर सुख और शांति की प्रार्थना की।


