बुरहानपुर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रदीप कुमार मोजेस को सोमवार को निलंबित कर दिया गया। वे नर्मदापुरम में सीएमएचओ भी रह चुके हैं। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के एक मामले में लोकायुक्त एसपी भोपाल की सिफारिश पर की गई है। डॉ. दर्पण टोके को सिविल सर्जन का अस्थायी प्रभार सौंपा गया है। डॉ. मोजेस का निलंबन संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा भोपाल के निर्देश पर हुआ है। डॉ. दर्पण टोके को प्रभार
लोकायुक्त एसपी भोपाल ने मध्य प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव से डॉ. मोजेस को निलंबित करने का अनुरोध किया था। सोमवार दोपहर कलेक्टर हर्ष सिंह ने एक पत्र जारी कर डॉ. दर्पण टोके को सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जिला अस्पताल बुरहानपुर का अस्थायी प्रभार आगामी आदेश तक सौंपा है। डॉ. टोके शल्य क्रिया विशेषज्ञ हैं। बता दें कि डॉ. मोजेस के खिलाफ नर्मदापुरम में पूर्व पदस्थापन के दौरान रिश्वत लेने का मामला है। राज्य सरकार ने 15 दिसंबर 2025 को उनके खिलाफ कोर्ट में अभियोजन चलाने की स्वीकृति दी थी। अब इस मामले में डॉ. मोजेस के खिलाफ न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया जाएगा। यह है पूरा मामला
पूरा मामला रिश्वतखोरी से जुड़ा है। डॉ प्रदीप मोजेस और एक महिला संविदा लेखा प्रबंधक ने सीएमएचओ कार्यालय नर्मदापुरम में पदस्थ रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया था। दोनों ने सहायक ग्रेड.3 मदनमोहन वर्मा से बिल भुगतान के बदले रिश्वत की मांग की थी। यह घटना 29 अप्रैल 2022 की है। 2 मई 2022 को डॉ प्रदीप मोजेस ने 2 हजार रुपए और महिला लेखा प्रबंधक ने 3 हजार रुपए रिश्वत के रूप में लिए थे। इसी दौरान लोकायुक्त टीम ने दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया था। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं स्तर पर गठित राज्य स्तरीय समिति की 10 नवंबर 2025 को हुई बैठक में इस प्रकरण में अभियोजन स्वीकृति की अनुशंसा की गई थी। लोकायुक्त ने पिछले दिनों लिखे अपने पत्र में मध्य प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम 1966 के नियम 9.1 बी का हवाला दिया था। जिसके अनुसार शासकीय सेवक के विरुद्ध अपराध में चालान प्रस्तुत होने पर संबंधित कर्मचारी को निलंबित किया जाना अनिवार्य है। इसके बाद उनका निलंबन हुआ है।


