बुरहानपुर बन रहा है नया टाइगर कॉरिडोर:गणना के पहले दिन टाइगर, तेंदुआ, भालू के पगमार्क मिले, 26 बीटों में पहले दिन घूमी टीम

बुरहानपुर जिले में 18 दिसंबर से बाघ गणना की शुरुआत हो गई है। गणना के पहले ही दिन जंगल में टाइगर, तेंदुआ, भालू और भेड़िया सहित कई वन्यप्राणियों के पगमार्क मिलने से वन विभाग उत्साहित है। यह गणना राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा हर चार साल में कराई जाती है। जिले की कुल आठ वन रेंजों में यह सर्वे छह दिनों तक चलेगा। पहले तीन दिन यानी 18 से 20 दिसंबर तक मांसाहारी वन्यप्राणियों की गणना की जाएगी। इसके बाद 21 से 23 दिसंबर तक शाकाहारी वन्यप्राणियों पर फोकस रहेगा। इसके लिए जिले के वनकर्मियों को पहले से विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। देश में छठवीं बाघ गणना
डीएफओ विद्याभूषण सिंह ने बताया कि यह छठवीं अखिल भारतीय बाघ गणना है। पहले दिन जंगल में टाइगर, तेंदुआ, भालू और अन्य वन्यजीवों के पगमार्क मिले हैं। गणना के दौरान रोजाना करीब 5 किलोमीटर क्षेत्र में पगमार्क, पेड़ों पर खरोंच के निशान और शिकार के अवशेष जैसे साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। नेपानगर क्षेत्र की 26 बीटों में पहले दिन का सर्वे पूरा कर लिया गया है। नेपानगर एसडीओ विक्रम सुलिया के अनुसार यहां भी तेंदुआ और भेड़िया सहित अन्य वन्यप्राणियों के पगमार्क मिले हैं। नेपानगर क्षेत्र में भी अगले दो दिन मांसाहारी और उसके बाद तीन दिन शाकाहारी वन्यप्राणियों की गणना जारी रहेगी। महाराष्ट्र से बुरहानपुर तक बाघों की आवाजाही वन विभाग भले ही जिले में स्थायी रूप से बाघ होने की पुष्टि नहीं करता, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व से बाघों की आवाजाही बुरहानपुर क्षेत्र में होती रहती है। इसी वजह से इस बार गणना के पहले दिन बाघ के पगमार्क मिलने की संभावना जताई जा रही है। चार चरणों में होती है बाघ गणना बाघ गणना चार चरणों में पूरी की जाती है। पहले चरण में मैदानी सर्वे के जरिए पगमार्क, मल, खरोंच के निशान और शिकार के अवशेष दर्ज किए जाते हैं। दूसरे चरण में सैटेलाइट डेटा के माध्यम से जंगल की स्थिति, वन्यजीव कॉरिडोर और मानव दखल का आकलन किया जाता है। तीसरे चरण में चयनित क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाए जाते हैं। चौथे और अंतिम चरण में सभी आंकड़ों का विश्लेषण कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाती है। पगमार्क की तस्वीरें

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