बुरहानपुर जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसानों को इससे जोड़ा जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को खंडवा रोड स्थित महात्मा ज्योतिबाई फुले शनवारा सब्जी मंडी में जैविक हाट बाजार का शुभारंभ किया गया। इस हाट बाजार में प्राकृतिक रूप से उत्पादित गेहूं, दाल, धनिया, मेथी सहित विभिन्न जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए गए। विधायक अर्चना चिटनिस और अन्य जनप्रतिनिधियों ने फीता काटकर इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया, जिनमें दगडू पाटिल बसाड़, शहद उत्पादक संजय चौकसे, अक्षय जायसवाल, सोपान कापसे, रत्ना मेढे और संजय भवरे शामिल रहे। चिटनिस बोलीं- मिट्टी स्वस्थ तो लोग खुशहाल रहेंगे
विधायक अर्चना चिटनिस ने इस दौरान कहा कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसान अपनी मिट्टी और समाज के स्वास्थ्य का ध्यान रख रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि कीटनाशकों और उर्वरकों से रहित फसलें मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं। उनका मानना था कि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो लोग भी खुशहाल रहेंगे। कृषि उपसंचालक एम.एस. देवके ने बताया कि प्राकृतिक हाट बाजार में शहर के नागरिकों ने बड़ी संख्या में खरीदारी की। इसमें 8 किलो चना, 9 किलो मक्का, 2 किलो राई, 20 किलो पपीता, 1 कैरेट केला, 10 किलो शहद, 2 किलो घी, 50 किलो गेहूं, 15 किलो धनिया-मेथी, 6 किलो उड़द दाल और 4 किलो हल्दी की बिक्री हुई। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज माने, किशोर शाह, अन्य जनप्रतिनिधि, किसान और कृषि, उद्यानिकी विभाग तथा मंडी के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। यह है राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन…
प्राकृतिक खेती में रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों या रसायनों का उपयोग नहीं किया जाता है, बल्कि इसमें गाय के गोबर, गोमूत्र से तैयार जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत व प्राकृतिक तरीके से तैयार खाद का उपयोग किया जाता है। इस खेती से तैयार खाद्य पदार्थ तुलनात्मक रूप से पौष्टिक व सुरक्षित होते हैं। प्राकृतिक खेती के उत्पाद खाने के फायदे
प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पाद शरीर को शुद्ध एवं सुरक्षित भोजन प्रदान करते हैं, इनमें पोषक तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। स्वाद और सुगंध भी बेहतर होती है। ऐसे खाद्य पदार्थ मानसिक स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा शक्ति को मजबूत करते हैं। साथ ही बीमारियों से बचाव में सहायक होते हैं। ये खेती पर्यावरण संरक्षण में मददगार है। प्राकृतिक खेती के उत्पाद विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित माने जाते हैं।


