भास्कर न्यूज| गिरिडीह/बेंगाब ाद गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत अरतोका, साठीबाद, मंडरडीह, डंडाटांड़, महाचो सहित अन्य गावों में 8 पत्थर खदानें बगैर लीज के अवैध रूप से संचालित हो रही है। जिसमें सबसे अधिक चर्चे में अरतोका की अवैध पत्थर खदान है, जिसकी लीज 2020 में समाप्त हो चुकी है, इसके बाद से अब तक अवैध रूप से खुलेआम संचालित है। लेकिन जिला खनन विभाग अंजान बना हुआ है। जब जिला खनन विभाग की टीम कार्रवाई के लिए छापेमारी करने पहुंचती है, लेकिन जब टीम पहुंचने के पहले ही माइंस पूरी तरह से खाली हो जाती है। जेसीबी, पोकलेन हटाने के साथ कामगारों को साइड कर दिया जाता है। जब टीम पहुंचती है तो वहां सन्नाटा देख यह कहकर लौट जाती है कि सूचना गलत थी, कहीं भी अवैध माइनिंग नहीं हो रही है। इससे साफ है कि धंधेबाजों की सेटिंग से इलाके में अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। क्योंकि कार्रवाई का तरीका गुप्त होता है, लेकिन यहां पत्थर माफियाओं को पहले से ही पता होता है कि अमुक दिन व समय में टीम पहुंचने वाली है। इसके बाद टीम के निकलते ही दो चार घंटे बाद खनन शुरू हो जाता है। जिससे आसपास के इलाके के लोगों में सरकारी तंत्र के प्रति जबर्दस्त आक्रोश है। जानकारी के मुताबिक अरतोका में अवैध माइंस का संचालन लंबे समय से हो रहा है। गत 14 नवंबर 2025 को यहां ऐसा ही हुआ था। जब प्रशासन की टीम छापेमारी करने पहुंची, उससे पहले वहां से सब कुछ हट गया। फिर टीम के वापस लौटते ही कुछ घंटे में कारोबार शुरू हो गया। वर्तमान स्थिति यह है कि सिर्फ अरतोका व साठीबाद खदान से प्रतिदिन 80 हाइवा से अधिक पत्थर निकालकर आसपास के क्रशरों में खुलेआम आपूर्ति की जा रही है। खदान संचालन में प्रावधानों की अनदेखी स्थानीय लोगों की मानें तो यह माइंस जब लीगल रूप से संचालित थी, तब भी यहां कई खामियां थीं। सरकारी प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए इसे संचालित किया जा रहा था। वन सीमा से सटे होने के कारण वन विभाग की ओर से भी कई बार कार्रवाई की जा चुकी है। अब तो अवैध ही है, इसमें तो प्रावधान का कोई मतलब ही नहीं है। इसके अलावा महाचो सहित अन्य पत्थर माइंस में भी सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खनन क्षेत्र के चारों ओर कंटीले तार से घेराबंदी का प्रावधान है, लेकिन कहीं भी घेराबंदी नहीं है। जिससे जान माल को भारी क्षति उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं वन सीमा व नदी नालों से जो दूरी का प्रावधान है उससे भी अनदेखी की जा रही है। वन भूमि व नदी नालों की खुदाई कर पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचाई जा रही है। अवैध रूप से चल रही अरतोका माइंस की भी यही दशा है। फिर की जाएगी छापेमारी : खनन पदाधिकारी डीएमओ सत्यजीत कुमार ने कहा कि हाल में माइनिंग इंस्पेक्टर विश्वनाथ उरांव के नेतृत्व में टीम छापेमारी करने अरतोका माइंस पर पहुंची थी, लेकिन वहां किसी तरह का न तो खनन हो रहा था और न ही खनन का कोई प्रमाण मिला। माइंस पर पूरी तरह से सन्नाटा पसरा था। यदि फिर से संचालन हो रहा है तो टीम फिर से जल्द ही छापामारी करने जाएगी, और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि खनन विभाग का काम अवैध धंधेबाजों के खिलाफ थाना में प्राथमिकी दर्ज कराना है। लेकिन थानों को कार्रवाई के प्रति गंभीर होना पड़ेगा।


