बेटी होने पर पति ने घर से निकाला:राष्ट्रीय महिला आयोग की सुनवाई में 35 मामलों का निराकरण;सदस्य ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी

बिलासपुर में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य ममता कुमारी ने केस की सुनवाई की। सोमवार को एक महिला ने बेटी होने पर पति के घर से निकालने की शिकायत की। उसने बताया कि पति पहले से ही मारपीट करता था। लेकिन जब उसकी बेटी हुई तो प्रताड़ना और बढ़ गया। मामला बिल्हा थाना क्षेत्र का है। पीड़िता ने बताया कि जब उसकी बेटी हुई तो पति ने घर से निकाल दिया। वह अपनी 10 माह की बेटी को लेकर शिकायत करने आई थी। जिस पर आयोग की सदस्य ने SP को मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बता दें कि सुनवाई के दौरान 35 मामलों का तुरंत निराकरण किया गया। वहीं सुनवाई के दौरान बहुत ही कम शिकायतकर्ताओं पहुंचे थे। जिसको लेकर ममता कुमारी ने अधिकारियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। 35 मामलों का निराकरण राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य ने पुलिस लाइन के चेतना हॉल में पीड़ित महिलाओं के मामलों की सुनवाई की। इस दौरान साल 2022 से 2025 के बीच के बिलासपुर के 29, मुंगेली के 2, कोरबा व जांजगीर-चांपा जिले के 8-8 सहित 48 मामले लिए गए। 35 मामलों का निराकरण होने की जानकारी दी गई। जबकि, बाकी मामले लंबित थे। इस पर आयोग की सदस्य ने कहा कि जो मामले अभी भी जांच के अधीन हैं, जिसमें जांच पूरी करें और निर्धारित समय के भीतर क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। युवती की एडिट फोटो कराया डिलीट सुनवाई के दौरान एक युवती ने अपने मंगेतर के खिलाफ शिकायत की। उसने बताया कि उसकी एडिट की हुई फोटो कई अकाउंट में शेयर की गई है। सदस्य ने एसपी को तत्काल अकाउंट ब्लॉक व​ डिलीट करने के निर्देश दिए। तीन अकाउंट ब्लॉक कर दो को डिलीट किया गया। पुलिस संवेदनशील होकर महिलाओं की सुनें शिकायत महिला आयोग की सदस्य ने एसपी रजनेश सिंह की मौजूदगी में कहा कि पुलिस प्रशासन महिलाओं के मुद्दों पर संवेदनशीलता और शीघ्रता से कार्य कर उन्हें राहत प्रदान करें। इस मामले में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए। सदस्य ममता कुमारी ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि यदि महिलाओं से जुड़ी शिकायतों की गंभीरता से जांच व कार्यवाही होगी तो प्रकरण आयोग तक नहीं पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा महिलाओं के मुद्दों पर अधिक संवेदनशीलता की अपेक्षा है। उन्होंने मामलों का निराकरण करने थाना प्रभारियों को एक सप्ताह का समय दिया। उन्होंने महिला हेल्पलाइन सखी वन स्टॉप सेंटर, बालिका गृह और कामकाजी महिला हॉस्टल का निरीक्षण किया। शिकायतकर्ताओं के नहीं आने पर जताई नाराजगी आयोग की सदस्य को इतनी कम संख्या में शिकायतकर्ताओं के आने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने सूचना नहीं दिए जाने पर अधिकारियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आयोग की सुनवाई में इतनी कम संख्या में लोग पहुंचे हैं, यह दुखद है। दरअसल, अधिकांश मामलों में शिकायतकर्ता पहुंचे ही नहीं थे। पता करने पर मालूम हुआ कि उन्हें सूचना ही नहीं मिली है। इस दौरान छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य लक्ष्मी वर्मा, सरला केसरिया ने राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य का स्वागत किया। सुनवाई में महिला बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी व विभागीय अधिकारी के साथ बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी व वकीलों की भी उपस्थित रही।

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