चाईबासा के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत बड़ा बालजोड़ी गांव का रहने वाला डिंबा चतोंबा अपने चार साल के मासूम बेटे को गोद में नहीं, बल्कि एक थैले में भरकर घर ले जाने को मजबूर हो गया। उस पिता की आंखों में आंसू थे, हाथ कांप रहे थे और दिल में एक ऐसा दर्द था, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। दो दिन पहले डिंबा का इकलौता बेटा अचानक बीमार पड़ा। परिवार उसे सदर अस्पताल चाईबासा लेकर पहुंचा। पर शुक्रवार दोपहर बच्चे की सांसें थम गईं। बेटे की मौत के बाद जो हुआ, उसने व्यवस्था की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने शव घर ले जाने को कहा, लेकिन न एंबुलेंस मिली, न शव वाहन। बेहद गरीब डिंबा चतोंबा के पास न तो साधन थे, न पैसे। उसकी जेब में सिर्फ 100 रुपए थे। उसने 20 रुपए की एक प्लास्टिक थैली खरीदी। उसी में लाडले के शव को रखा। बाकी बचे पैसों से बस का किराया दिया चाईबासा से नोवामुंडी तक शव लेकर बस में सफर किया। वहां से वह पैदल चलते हुए अपने गांव बड़ा बालजोड़ी पहुंचा। जानिए…मरीज की मौत पर एम्बुलेंस लेने का नियम


