बेटे ने लगाई फांसी, मां-बेटी ने खाई नींद की कई गोलियां

अरगोड़ा थाना क्षेत्र के कडरू स्थित न्यू एजी कॉलोनी में सोमवार दोपहर एक दर्दनाक घटना सामने आई। आर्थिक तंगी से परेशान एक परिवार ने सामूहिक आत्महत्या की कोशिश की। इसमें फांसी लगाने से 24 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि उसकी अधिवक्ता मां और 14 वर्षीय बहन नींद की गोलियां खाने के बावजूद बच गईं। दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतक की पहचान मिहिर शेखर (24) के रूप में हुई है। मिहिर ने सीए था। पर नौकरी नहीं होने से परेशान था। उसकी मां स्नेहा अखौरी (50) झारखंड हाईकोर्ट की अधिवक्ता हैं, जबकि बहन सौम्या (14) कक्षा 8 की छात्रा है। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, परिवार में फिलहाल कोई कमाने वाला नहीं था। इसी कारण पिछले कुछ दिनों से पूरा परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था। इलाजरत सौम्या ने पुलिस को बताया कि आर्थिक तंगी से परेशान होकर पूरे परिवार ने आत्महत्या का फैसला लिया था। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पिता की मौत के बाद मामा के घर रहता था परिवार पुलिस जांच में सामने आया है कि मिहिर पिछले कई वर्षों से मां और बहन के साथ अपने मामा के घर रह रहा था। उसके पिता कुमार संजय, जो एक बैंक अधिकारी थे, उनका 13 साल पहले हार्ट अटैक से निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी मिहिर की मौसी किरण अखौरी ने संभाली। मौसी सेल टैक्स विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर पद से रिटायर्ड थीं। उन्होंने ही मिहिर की पढ़ाई पूरी कराई और बहन का खर्च भी उठाया। सीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद मिहिर को कोलकाता की एक निजी कंपनी में नौकरी मिली थी। 13 जनवरी को मिहिर की मौसी किरण अखौरी का अचानक निधन हो गया। अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए 15 दिन पहले मिहिर कोलकाता से रांची आया था। इसके बाद उसकी नौकरी भी चली गई। झूठ बोलकर 3 दिन से घर में बंद थे मां-बेटे और बेटी परिजनों ने बताया कि स्नेहा ने शुक्रवार को ही ननद सुधा सिन्हा को बताया था कि वे परिवार के साथ कोलकाता जा रही हैं। इसके बाद वे बेटी और बेटे के साथ फ्लैट बंद कर तीन दिनों तक घर के अंदर ही रहीं। सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे ऊपर रहने वाली मामी सुधा सिन्हा को घर के अंदर से तेज आवाज सुनाई दी। दरवाजा अंदर से बंद था। काफी खटखटाने के बाद सौम्या ने दरवाजा खोला। अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। सुधा सिन्हा ने बताया कि उन्हें लगा था कि पूरा परिवार कोलकाता चला गया है। लेकिन दोपहर में बंद घर से तेज आवाज आई। दरवाजा खुलवाने पर देखा कि मिहिर फांसी लगा चुका है। स्नेहा-सौम्या बदहवास हालत में थे। 15 दिन पहले नौकरी छूटने से परेशान था मिहिर शेखर
रविवार की देर रात तीनों ने एक साथ लिया था सुसाइड करने का फैसला रविवार देर रात मां स्नेहा अखौरी ने बेटा-बेटी के साथ आत्महत्या की योजना बनाई थी। तय हुआ कि नींद की गोलियां खाएंगी, जबकि भाई फांसी लगाएगा। मां-बेटी ने एक साथ 17-17 पत्ते नींद की दवाइयां खा लीं। सोमवार दोपहर अचानक तेज आवाज से सौम्या की नींद खुली। सामने हॉल में भाई मिहिर फंदे से झूल रहा था और नीचे कुर्सी गिरी हुई थी। उसने चाकू से गमछा काटकर भाई को नीचे उतारा। इसके बाद मेन गेट खटखटाने की आवाज आई। किसी तरह वहां तक पहुंच कर उसने कुंडी खोली। फिर सामने खड़ी मामी अखौरी सुधा सिन्हा को पूरी जानकारी दी। बेटे की मौत, मां-बेटी की हालत गंभीर, निजी अस्पताल में इलाज

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