जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपा गुर्जर ने सोमवार को राजकीय भगवानदास खेतान (बीडीके) अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल परिसर में संचालित ‘पालना गृह’ की कार्यप्रणाली का बारीकी से निरीक्षण किया और चिकित्सा सेवाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जिला जज ने अस्पताल की साफ-सफाई और आईसीयू की उच्च स्तरीय सेवाओं पर संतोष व्यक्त किया। मॉक ड्रिल: सेकंडों में दौड़ा स्टाफ पालना गृह की संवेदनशीलता को जांचने के लिए जिला जज ने स्वयं एक मॉक ड्रिल करवाई। जैसे ही पालना गृह के बेड पर कृत्रिम वजन रखा गया, अस्पताल की आपातकालीन इकाई (Emergency Unit) में अलार्म की घंटी बज उठी। अलार्म सुनते ही ड्यूटी पर तैनात स्टाफ सक्रिय हो गया और तुरंत दौड़कर पालना गृह पहुंच। स्टाफ की इस त्वरित प्रतिक्रिया और मुस्तैदी की जिला जज ने प्रशंसा की।
पीएमओ ने बताया कि संस्थान द्वारा गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाता है और बच्चों को छोड़ने वाले परिजनों की पहचान उजागर नहीं की जाती है।
इसका मुख्य उद्देश्य अनचाहे नवजात शिशुओं को असुरक्षित स्थानों पर फेंकने के बजाय उन्हें सुरक्षित और चिकित्सकीय देखरेख में लाना है। अस्पताल में जल्द शुरू होगी वीसी के जरिए गवाही निरीक्षण के अंत में जिला जज ने अस्पताल प्रबंधन को एक महत्वपूर्ण सौगात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीडीके अस्पताल में जल्द ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से गवाही करवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे चिकित्सकों और स्टाफ को कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उनके समय की बचत होगी, जिसका सीधा लाभ मरीजों के उपचार में मिल सकेगा।


