बेवजह के ब्रेकर सेहत पर पड़ रहे भारी:राजधानी में झटकों का सफर… तीन किलोमीटर में 36 ब्रेकर

सड़क पर स्पीड ब्रेकर होने चाहिए, लेकिन वहां, जहां दुर्घटना का खतरा हो। इससे उलट शहर के कई क्षेत्रों में बेवजह अत्यधिक संख्या में स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, जो वाहन चालकों और सड़क पर चलने वालों के लिए बड़ी समस्या बन गए हैं। खासकर प्रमुख इलाकों में जहां 500 मीटर के भीतर 8-10 ब्रेकर बनाए गए हैं। अशोका गार्डन की 80 फीट मेन रोड पर 3 किलोमीटर के दायरे में 36 स्पीड ब्रेकर लगे हैं, जो सड़क पर यात्रा करने वालों के लिए दर्दनाक साबित हो रहे हैं। इन ब्रेकरों के कारण हड्डी संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
ब्रेकरों से हड्डी संबंधी समस्याओं में इजाफा,डॉक्टर के पास जा रहे लोग
शहर के फिजियोथेरेपिस्ट के पास रोजाना 5 से 6 नए मरीज पहुंच रहे हैं, जो इन ब्रेकरों के कारण गर्दन, कमर और अन्य शरीर के हिस्सों में दर्द का शिकार हो रहे हैं। इन मरीजों की संख्या महीने में लगभग 150 और सालाना करीब 1800 तक पहुंच जाती है। विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों को इससे अधिक परेशानी हो रही है। इन ब्रेकरों से उत्पन्न झटकों के कारण उनकी हड्डियों पर बुरा असर पड़ रहा है। बड़े ब्रेकरों से प्रेगनेंट महिलाओं और बुजुर्गों को परेशानी: अत्यधिक ऊंचे और बड़े ब्रेकर न केवल युवाओं के लिए, बल्कि प्रेगनेंट महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भी मुसीबत बन गए हैं। इन ब्रेकरों के कारण शरीर में भारी झटके लगते हैं, जिससे दर्द और शारीरिक परेशानी होती है। खासकर बुजुर्गों के लिए इन ब्रेकरों से चलने में कठिनाई और असुविधा उत्पन्न हो रही है। यह है परेशानी हड्डी की समस्या, फिजियोथेरेपिस्ट के पास रोज पहुंच रहे 5-6 मरीज, अशोका गार्डन की 80 फीट रोड पर 3 किमी में 36 स्पीड ब्रेकर बागसेवनिया, कोहेफिजा और अन्य इलाकों में भी समस्याएं भोपाल के बागसेवनिया क्षेत्र में भी 50 मीटर के दायरे में 4 ब्रेकर लगे हुए हैं, जिससे दोपहिया चालक ब्रेकर से बचने के लिए साइड से निकलने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार इस दौरान हादसे हो जाते हैं। हाल ही में, यहां एक स्कूटी सवार व्यक्ति ब्रेकर पर गिरकर घायल हो गया। कोहेफिजा, रचना नगर और अन्य इलाकों में भी ब्रेकरों की अधिकता से वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। अशोका गार्डन में हादसों की आशंका
अशोका गार्डन की 80 फीट रोड पर सबसे अधिक 36 स्पीड ब्रेकर हैं। यहां ब्रेकरों की अधिकता और उनकी ऊंचाई इतनी ज्यादा है कि हर ब्रेकर पर वाहन चालकों को जोरदार झटका लगता है। इसके चलते सड़क पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है। वाहन चालकों को हर मोड़ पर असंतुलित होने का डर रहता है, जिससे गंभीर शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सावरकर सेतु पर भी समस्या
सावरकर सेतु पर स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं। जबकि नियम यह कहते हैं कि ब्रिज पर स्पीड ब्रेकर का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। इस स्पीड ब्रेकर के चलते लोगों का काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। हादसे की आशंका बनी रहती है। रचना नगर, सुभाष नगर और खानूगांव में दोपहिया वाहन चालकों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है
रचना नगर में 300 मीटर की सड़क पर 4 ब्रेकर लगाए गए हैं, जिससे लोगों को अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता है। वहीं, सुभाष नगर में 850 मीटर की सड़क पर 9 ब्रेकर बने हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। खानूगांव में भी 200-200 मीटर की दो सड़कों पर 10 ब्रेकर लगे हैं, जो दोपहिया वाहन चालकों के लिए बेहद परेशानियों का कारण बन रहे हैं। समाधान – ब्रेकर हटाकर रंबल स्ट्रिप्स का इस्तेमाल करना चाहिए कॉलोनी की एप्रोच रोड पर ही स्पीड ब्रेकर लगाए जाने चाहिए, लेकिन इसके लिए पहले एक उचित सर्वेक्षण और जांच होनी चाहिए। कॉलोनी की एप्रोच रोड से लेकर मुख्य सड़कों तक ब्रेकरों की अत्यधिक संख्या एक गंभीर समस्या बन गई है। ऐसे ब्रेकर जिन्हें हटाया जा सकता है, उन्हें तुरंत हटा दिया जाना चाहिए। इन ब्रेकरों के विकल्प के तौर पर ट्रांस्वर्स बार मार्किंग यानी रंबल स्ट्रिप्स का उपयोग किया जा सकता है, जिससे सड़क पर वाहन की गति नियंत्रित रहेगी । साथ ही, इससे हड्डी संबंधी समस्याओं में भी कमी आएगी।
डॉ. सिद्धार्थ रोकड़े, मैनिट ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट

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