राजस्थान क्राइम फाइल्स के पार्ट 1 में आपने पढ़ा कि जयपुर में सिटी बैंक के ब्रांच मैनेजर रोशनलाल यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस कई एंगल पर जांच कर रही थी, लेकिन कुछ भी ठोस नहीं मिल पा रहा था। पुलिस अभी भी इन सवालों के जवाब ढूंढने में लगी थी … अब पढ़िए आगे की कहानी… पुलिस ने रोशनलाल के मकान के आस-पास के लोगों से पूछताछ की। लोगों ने एक शख्स उमेश शर्मा पर शक जाहिर किया। पुलिस को उसके मोबाइल नंबर भी दे दिए। उमेश पहले रोशनलाल के पड़ोस में ही रहता था। तब पारिवारिक बातों को ले कर रोशनलाल, उन की पत्नी निर्मला और उमेश के बीच कई बार झगड़े होते थे। बाद में उमेश वहां से खुद का मकान खाली करके जयपुर में ही मानसरोवर में रहने लगा था। उस ने गणेश नगर विस्तार के अपने मकान के 2 कमरे किराए पर दे दिए थे। अपने मकान की देखभाल को लेकर उमेश आए दिन इस काॅलोनी में आता रहता था। पुलिस ने उमेश के मोबाइल नंबरों की लोकेशन खंगाली। उसकी करंट लोकेशन उत्तराखंड आई। वो पुलिस के फोन कॉल्स का कोई जवाब नहीं दे रहा था। बाद में उसने अपना मोबाइल भी स्विच ऑफ कर लिया था। इससे पुलिस का शक उस पर गहरा गया था। इसके बाद पुलिस ने उत्तराखंड पुलिस की मदद से 21 सितंबर को उमेश और उस के 3 साथियों को अल्मोड़ा से पकड़ लिया। उमेश ने कबूल कर दी हत्या की साजिश पुलिस उमेश और उसके तीन साथियों को जयपुर ले आई। थोड़ी सी पूछताछ में ही उमेश ने पुलिस के सामने कबूल लिया कि रोशनलाल का मर्डर उसी ने करवाया है। उसने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसने रोशनलाल की हत्या की सुपारी अपने भाई के मार्फत उत्तर प्रदेश के शूटरों को दी थी। उमेश ने बताया कि वो ठेकेदारी करता था। इसी काम के बहाने वह रोशनलाल के मर्डर से करीब 10 दिन पहले उत्तराखंड चला गया था। ताकि मर्डर के वक्त उसकी लोकेशन जयपुर में न आए। उत्तराखंड से ही वह मोबाइल के जरिए रोशनलाल की एक्टिविटी पर नजर रखे हुए था। उमेश ने पुलिस को बताया कि रोशनलाल के मर्डर की प्लानिंग में उसकी पत्नी निर्मला भी शामिल थी। इस पर पुलिस ने निर्मला को थाने बुला कर पूछताछ की। निर्मला और उमेश से अलग-अलग और आमने-सामने बैठा कर की गई पूछताछ में रोशनलाल के मर्डर का राज खुल कर सामने आ गया। दरअसल निर्मला का उमेश से अफेयर था। उसे अपने पति रोशनलाल की प्रॉपर्टी भी चाहिए थी, इसीलिए उसने रोशनलाल को तलाक देने के बजाय उसका मर्डर करवाया था। रोशनलाल को अपनी पत्नी की बेवफाई का पहले से पता था। वो तो निर्मला की उससे प्रेमी से शादी कराने के लिए भी तैयार थे, लेकिन उमेश कोर्ट नहीं पहुंचा। ऐसे में उमेश और निर्मला की शादी नहीं हो सकी। निर्मला यादव और उमेश शर्मा से पूछताछ में पूरी कहानी पुलिस के सामने आ गई… रोशनलाल यादव जयपुर जिले के कोटपुतली के पवाना गांव के रहने वाले थे। सन 2004 में रोशन की निर्मला से शादी हो गई। वह उनसे उम्र में 6 साल छोटी थी। निर्मला की शादी हुई, तब वह 11वीं क्लास में पढ़ती थी। उन्होंने शादी के बाद निर्मला को एमए तक पढ़ाया। साथ ही फैशन डिजाइनिंग का कोर्स भी कराया। साल 2010 में जयपुर में पोस्टिंग होने पर रोशनलाल ने करधनी में एक प्लाॅट ले कर अपना मकान बनवा लिया। उसी दौरान उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के नई आबादी रैना गांव के रहने वाले उमेश शर्मा ने भी रोशनलाल के पड़ोस में अपना मकान बनवाया था। दोनों ने एक ही दिन अपने-अपने मकान में गृह प्रवेश किया। उमेश शर्मा 2003 के आसपास जयपुर आया था। उमेश ने प्रॉपर्टी में काफी पैसा कमाया। साल 2010 तक उसके पास करधनी इलाके में 2 मकान और अजमेर रोड पर बिचून में 15 बीघा जमीन थी। कई प्रॉपर्टीज में उस ने मोटा इन्वेस्टमेंट लगा रखा था। इसके अलावा भी अब वह ठेकेदारी का काम भी करने लगा था। पड़ोसी होने के नाते उमेश व रोशनलाल के परिवार के बीच अच्छे रिलेशन थे। एक-दूसरे के घर भी दोनों का आना-जाना लगा रहता था। दोनों परिवार एक-दूसरे के सुख-दुख में भी काम आते थे। साल 2016 में उमेश और रोशनलाल सहित काॅलोनी के कई परिवार साथ में शिमला घूमने गए। इस दौरान शिमला में उमेश की निर्मला से नजदीकियां बढ़ गई। रोशनलाल को दोनों के रिश्ते का पता चल गया शिमला से लौटने के कुछ दिन बाद ही निर्मला के भाई की मौत हो गई। उस समय सांत्वना देने के लिए उमेश का पूरा परिवार कई बार निर्मला के घर गया। धीरे-धीरे दोनों छिप-छिपकर मिलने लगे। दोनों के बीच फिजिकल रिलेशन बन गए। उनके नाजायज रिश्ते की भनक पड़ोसियों को भी लग गई। पड़ोसियों से होते हुए बात रोशनलाल तक पहुंची। रोशनलाल गुस्से में घर पहुंचा। निर्मला को प्यार से और डांटकर समझाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं मानी। इस के बाद दोनों परिवारों में झगड़े होने लगे। निर्मला से अवैध संबंधों को लेकर कई बार उमेश और रोशनलाल के बीच मारपीट की नौबत भी आ गई थी। नवंबर 2017 में उमेश गणेश नगर विस्तार करधनी का अपना घर खाली कर मानसरोवर काॅलोनी में रजत पथ पर किराए के मकान में रहने लगा। उमेश ने रोशन के पड़ोस का अपना मकान किराए पर दे दिया था। उमेश भले ही रोशनलाल के मकान से 20 किलोमीटर दूर रहने लगा था, लेकिन अब भी उसकी और निर्मला की फोन पर बातचीत होती थी। इसके अलावा जब भी मौका मिलता दोनों चोरी-छिपे एक दूसरे से मिल भी लेते थे। निर्मला जब भी उमेश से मिलती, उससे अपने पति रोशनलाल को रास्ते से हटाने की बात कहती थी, ताकि दोनों बिना किसी डर के एक-दूसरे के साथ रह सकें। निर्मला के बार-बार उकसाने पर उमेश ने तय कर लिया कि रोशनलाल को रास्ते से हटाना ही होगा। 4 लाख रुपए में दी हत्या की सुपारी अप्रैल 2018 में उमेश ने क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले अपने सगे भाई राहुल शर्मा को रोशन की हत्या की जिम्मेदारी सौंप दी। उमेश ने इसके लिए राहुल को 4 लाख रुपए भी दिए। राहुल के खिलाफ उत्तर प्रदेश में मारपीट, लूट और वाहन चोरी के कई मामले दर्ज थे। राहुल ने पहले जयपुर के जगतपुरा में टीएस टैक्सटाइल्स नाम से बेडशीट बनाने की फैक्ट्री लगा रखी थी, जिसमें उसे काफी नुकसान हुआ था। वह कर्ज में डूबा हुआ था। राहुल भी पहले गणेश नगर विस्तार में ही रहता था, बाद में वह जगतपुरा में रहने लगा था। राहुल ने रोशनलाल के मर्डर के लिए उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के शूटर शिवकांत उर्फ लालू, पप्पू कश्यप और विष्णु कश्यप नाम के बदमाशों से कॉन्टेक्ट किया। बदमाश हथियार ले कर जयपुर पहुंच गए। राहुल ने 29 मई से 1 जून तक तीनों बदमाशों को जयपुर के एक होटल में ठहराया। राहुल ने मर्डर के लिए शूटर शिवकांत को 30 हजार रुपए, विष्णु को 15 हजार और पप्पू कश्यप को 10 हजार रुपए एडवांस दिए थे। राहुल ने इन बदमाशों से रोशनलाल की उनके मकान, सिटी बैंक और कोटपुतली के पास स्थित गांव के आसपास की रैकी करवाई। उमेश भी रैकी के दौरान कई बार इन शूटरों के साथ जाता था। रैकी के दौरान निर्मला अपने पति के आने-जाने की पूरी इन्फॉर्मेशन उमेश को देती रही। कई बार की कोशिशों के बावजूद शूटरों को रोशनलाल की हत्या का मौका नहीं मिला। बाद में तीनों शूटर जयपुर से वापस चले गए। शूटरों ने मर्डर के लिए 15 लाख मांगे 2 सप्ताह बाद ही राहुल ने फिरोजाबाद से तीनों शूटरों को फिर जयपुर बुलाया। उन्हें 15 और 16 जून को गोपालपुरा के एक होटल में ठहराया गया। इस बार भी राहुल और उमेश ने रोशनलाल की रैकी करवाई, लेकिन शूटर अपने काम को अंजाम नहीं दे सके। इस बीच शूटरों को पता चला कि राहुल तो केवल मोहरा है। रोशनलाल की जान तो उमेश लेना चाहता है और उमेश काफी मोटा आसामी है। ऐसे में शूटर्स ने राहुल से रोशनलाल को मारने के एवज में अब अपनी डिमांड बढ़ा कर 15 लाख रुपए मांगे। राहुल उन दिनों कर्ज में डूबा हुआ था। रोशनलाल की सुपारी के नाम पर वह अपने भाई उमेश से 4 लाख रुपए पहले ही ले चुका था। दूसरी ओर निर्मला लगातार उमेश पर रोशन को मरवाने के लिए दबाव बना रही थी। इस पर उमेश ने अपने भाई राहुल पर रोशनलाल की जल्द से जल्द हत्या करवाने या 4 लाख रुपए वापस लौटाने का दबाव बनाया। भाई पर दबाव बना कर उमेश उत्तराखंड चला गया। उसे उम्मीद थी कि जल्दी ही रोशनलाल का खेल खत्म हो जाएगा। अपने बचाव के लिए वह अपने साथी महेंद्र प्रताप उर्फ टीटू के साथ अल्मोड़ा में काम करने वाले अपने साले आकाश रावत के पास चला गया। महेंद्र प्रताप उर्फ टीटू को रोशनलाल की हत्या की साजिश के बारे में बताया। महेंद्र प्रताप उमेश के गांव के पास का ही रहने वाला था। दोनों भाइयों उमेश व राहुल का खास दोस्त था। उमेश ने महेंद्र प्रताप को काफी पेमेंट भी दे रखा था। भांजे के साथ मिलकर मर्डर का प्लान 18 सितंबर को निर्मला ने उमेश को फोन किया। अब तक रोशनलाल का मर्डर नहीं होने पर उससे झगड़ा किया। इस पर उमेश ने अपने भाई राहुल को जल्द ही रोशन की हत्या या पेमेंट वापस करने का अल्टीमेटम दे दिया। उन दिनों राहुल का भांजा फरीदाबाद निवासी मनीष उर्फ सनी जयपुर आया हुआ था। आखिरकार राहुल ने अपने भांजे के साथ मिल कर रोशनलाल की हत्या करने का प्लान बनाया। राहुल ने मनीष के साथ मिल कर 19 सितंबर की रात करीब 9 बजे गोली मारकर रोशनलाल की हत्या कर दी। राहुल ने तुरंत उमेश को फोन करके बताया कि उसने रोशन को मार दिया है। रोशनलाल की मौत की सूचना मिलने के बाद उमेश के साले आकाश रावत ने राहुल के बैंक खाते में 20 हजार रुपए ट्रांसफर किए। पुलिस ने रोशनलाल के मर्डर के मामले में उस की पत्नी निर्मला यादव और उसके प्रेमी उमेश शर्मा के अलावा जयपुर के करधनी इलाके में गणेश नगर विस्तार के रहने वाले महेंद्र प्रताप ओझा उर्फ टीटू, उमेश के साले आकाश रावत और फिरोजाबाद के शूटर शिवकांत उर्फ लालू को गिरफ्तार कर लिया था। आकाश रावत मूलत: आगरा के सिकंदरा थानांतर्गत शास्त्रीपुरम का रहने वाला था। वह मर्डर के वक्त उत्तराखंड में जिला ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर में रह रहा था। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई राहुल की स्कूटी उस के घर से बरामद कर ली। पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि रोशनलाल ने लोगों को करीब 50 लाख रुपए ब्याज पर दे रखे थे। निर्मला इस रकम के साथ-साथ रोशनलाल की सारी प्रॉपर्टीज पर अपना हक चाहती थी। यही वजह थी कि तलाक लेने के बजाय उसने रोशनलाल का मर्डर करवा दिया। पत्नी की शादी कराने के लिए भी तैयार था रोशनलाल उमेश ने भी रोशनलाल से मोटी रकम ब्याज पर ले रखी थी। उमेश जानना था कि रोशनलाल ही नहीं रहेगा तो उसे ये पैसे कभी नहीं चुकाने पड़ेंगे। निर्मला की तरह उमेश ने भी पैसे के लिए ही रोशनलाल का मर्डर कराया। वह निर्मला के सामने यह दिखावा करता रहा कि वह यह सब उसके प्यार के लिए किया है। इधर इन्वेस्टिगेशन में ये भी पता चला था कि उमेश और निर्मला के अवैध संबंधों के बारे में रोशनलाल को सब से पहले उमेश की पत्नी ने ही बताया था। इसके दूसरे ही दिन रोशन ने घर में नया मोबाइल चार्जिंग के लिए लगा देखा तो निर्मला ने बताया कि यह मोबाइल उमेश ने दिया है। रोशन ने मोबाइल में निर्मला और उमेश के बीच हुई वॉट्सऐप चैट भी देखी। रोशनलाल और निर्मला के 2 बेटियां और एक बेटा था। अपने बच्चों के भविष्य और निर्मला का उमेश के प्रति झुकाव देखकर वह उन दोनों की शादी कराने के लिए भी तैयार हो गया था। दोनों पति-पत्नी कोर्ट में पहुंच भी गए, लेकिन उमेश नहीं पहुंचा। इस के कुछ दिन बाद तक रोशन के घर में शांति रही। कुछ दिन बाद निर्मला फिर उमेश से मिलने लगी। एक दिन रोशन ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया। निर्मला ने कहा कि उमेश ने उसके साथ जबरदस्ती की है। इस पर रोशन उसे उमेश के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराने के लिए थाने ले गया। निर्मला थाने तो चली गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। उसने रोशनलाल से वादा किया कि दोबारा उमेश से नहीं मिलेगी और लौट आई। खुद कराती पति को धमकी भरे फोन कुछ दिन बाद निर्मला तीन साल के बेटे को गोद में लेकर उमेश के साथ भागने के लिए घर से निकल गई। निवारू रोड पर वह उमेश से मिलने के बाद अपने रिश्तेदार के घर चली गई। बाद में रोशन उसे समझा-बुझा कर घर ले आए। निर्मला उमेश के प्यार में इतनी अंधी हो गई थी कि वह अपने प्रेमी और उसके रिश्तेदारों के जरिए पति को धमकी भरे फोन करवाती। फिर खुद ही पड़ोसियों से जा कर कहती कि पति को कोई जान से मारने की धमकी दे रहा है। हत्या से करीब एक सप्ताह पहले ही निर्मला और रोशनलाल के बीच झगड़ा हुआ था तब ये मामला पुलिस तक भी पहुंच गया था। रोशन ने उसे मिल रही धमकियों के बारे में पुलिस को बताया, लेकिन पुलिस ने मामले को सीरियस न ले कर दोनों को समझा कर घर भेज दिया। पुलिस ने तब यह जानने की भी कोशिश नहीं की कि धमकियां कहां से मिल रही हैं? अगर पुलिस तब रोशनलाल की बातों को गंभीरता से लेकर इंवेस्टिगेट करती तो शायद मर्डर की वारदात टल सकती थी। फिलहाल इस केस में कोर्ट ट्रायल चल रहा है। शूटर राहुल शर्मा और उसका भांजा फरीदाबाद निवासी मनीष उर्फ सनी अभी फरार हैं। वहीं बाकी सभी आरोपी फिलहाल जमानत पर है। ….. क्राइम फाइल्स में बैंक मैनेजर हत्याकांड का पार्ट-1 भी पढ़िए बैंक मैनेजर की हत्या का 6 साल पुराना केस:रात को बीच सड़क मारी गोली, कई लोगों का ब्याज पर दे रहे थे लाखों रुपए, पार्ट-1


