नागौर जिला मुख्यालय पर अतिक्रमण की शिकायतों पर जिला कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कलेक्टर के पास नागौर-डेह रोड पर बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत प्राप्त हुई थी, जिस पर उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए। इसी क्रम में उपखंड अधिकारी नागौर गोविंद सिंह भींचर ने तहसीलदार को पूरे मामले की जांच कर मौके से अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश दिए। प्रशासन की इस त्वरित सक्रियता से अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया। दो बीघा भूमि से हटाए अवैध ढांचे तहसीलदार नरसिंह टाक के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने बुधवार को डेह नेशनल हाईवे पर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। जांच के दौरान पाया गया कि खसरा नंबर 532 की गैर मुमकिन अंगोर भूमि पर करीब एक बीघा क्षेत्र में दो दुकानें और एक ढाबा बनाकर अतिक्रमण किया गया था। इसी प्रकार गोरखनाथ धुणें के पीछे भी इसी खसरा नंबर की जमीन पर अवैध रूप से चारदीवारी और दो अन्य दुकानों का निर्माण कर लिया गया था। नगर परिषद की जेसीबी मशीनों ने भारी पुलिस जाब्ते की मौजूदगी में इन सभी अवैध ढांचों को ढहा दिया और कुल दो बीघा सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाया। सुरक्षा घेरे के बीच हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किसी भी संभावित दुर्घटना और विरोध को देखते हुए प्रशासन ने पूरी सतर्कता बरती। कार्रवाई शुरू होने से पहले ही विद्युत विभाग की टीम को मौके पर बुलाकर बिजली के कनेक्शन विच्छेद करवाए गए ताकि ध्वस्तीकरण के समय कोई अनहोनी न हो। मौके पर कोतवाली पुलिस थाने का जाब्ता तैनात रहा, जिससे पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्वक संपन्न हुई। नगर परिषद के स्वच्छता निरीक्षक और राजस्व टीम के पटवारियों ने सीमा ज्ञान कर जमीन को पुनः सरकारी आधिपत्य में लिया। दोबारा कब्जा करने पर जेल की चेतावनी कार्रवाई के पश्चात तहसीलदार नरसिंह टाक ने मौके पर उपस्थित लोगों को कड़ी हिदायत दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मुक्त कराई गई राजकीय भूमि पर दोबारा अतिक्रमण करने का प्रयास किया गया, तो भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धाराओं के तहत सख्त मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पश्चावर्ती अतिक्रमण के मामले में दोषी को तीन माह तक के कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है। इस दौरान भू-अभिलेख निरीक्षक अनाराम लवाइच, ओमप्रकाश बेनीवाल और पटवारी दीपाराम गोदारा सहित राजस्व विभाग के कई कर्मचारी और पुलिस बल मौजूद रहा।


