मप्र में लगभग डेढ़ दशकों से महिलाएं और बच्चे सरकार की प्राथमिकता में रहे हैं, हालांकि अभी भी 97,000 आंगनवाड़ियों में से 40% के पास या तो खुद का भवन नहीं है या वे जर्जर भवन में चल रही हैं। नए भवनों का निर्माण जारी है। पिछले 5 साल में सिर्फ 1,399 नए भवन ही बन सके हैं। यानी हर साल औसतन 300 आंगनवाड़ियों को ही नया भवन मिल सका है। इसी गति से काम चलता रहा तो सभी आंगनवाड़ियों को भवन मिलने में 100 साल से अधिक का समय लगेगा। प्रदेश में कुल 97,329 आंगनवाड़ी केंद्र हैं। वहीं कुल 34,143 ऐसी आंगनवाड़ियां हैं जिनके पास खुद के भवन नहीं हैं। ये किराए के भवनों में चल रही हैं। इन पर 6 करोड़ रुपए सालाना किराए में जा रहे हैं। 4,044 जर्जर भवनों में चल रही हैं। पिछले 5 साल में प्रदेश सरकार ने कुल 194 नए आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत किए हैं, जबकि 4,320 आंगनवाड़ियों के लिए नए भवनों को स्वीकृति मिली। इनमें से 1,399 भवन ही बन सके। हर महीने किराए के रूप में लगभग 6 करोड़ जा रहे हैं।” आंगनवाड़ी का काम क्या


