बैंकों से ही हो रही ठगी:चर्चित फर्म के नाम पर भुगतान करने वॉट्सएप पर भेज रहे लेटरहेड, मैनेजर कर रहे पेमेंट

टाटीबंध स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक से 8.70 लाख रुपए की ठगी हुई है। बैंक मैनेजर को बिल्डर सुबोध सिंघानिया के नाम से फोन आया। ठग ने दो करोड़ रुपए का फिक्स्ड डिपॉजिट कराने का झांसा दिया। इसके बाद कहा कि एक पार्टी ऑफिस में बैठी है और उन्हें तुरंत भुगतान करना है। वाट्सएप पर कंपनी का लेटरहेड भेजा गया। इसके आधार पर बैंक ने अवतार सिंह को पेमेंट कर दिया। ट्रांजेक्शन का मैसेज मिलने के बाद बिल्डर को ठगी का पता चला। बिल्डर अब बैंक से अपना पैसा वापस मांग रहे हैं। बैंक ने पुलिस में रिपोर्ट कराई है। 15 दिन के भीतर इस तरह की यह दूसरी ठगी है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बेटे से 58 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी हुई थी। उनके साथ भी लेटरहेड का दुरुपयोग किया गया था। पुलिस के अनुसार इंडियन ओवरसीज बैंक, टाटीबंध ब्रांच के मुख्य प्रबंधक के पास 17 सितंबर को सिंघानिया बिल्डकॉन के नाम से कॉल आया। सामने वाले ने 2 करोड़ रुपए एफडी कराने की बात कही गई। मुख्य प्रबंधक ने यह कॉल सहायक प्रबंधक अमकी मुर्मू को ट्रांसफर किया। अमकी ने कॉल रिसीव किया तो कॉलर ने खुद को कारोबारी सुबोध सिंघानिया बताया। चूंकि उनके बैंक में हर्षित अर्बन सिटी बिल्डकॉन के डायरेक्टर सुबोध सिंघानिया का खाता है। ऐसे में सहायक प्रबंधक ने लेटर देखकर पैसा ट्रांसफर कर दिया गया। अमकी की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात ठग पर केस दर्ज किया है। इसी पैटर्न पर पहले भी हो चुकी है ठगी, फिर भी बैंकों में लापरवाही जानिए, इस मामले में क्या कहते हैं बैंक के रिटायर्ड अफसर, साइबर एक्सपर्ट और पुलिस अधिकारी केवल रिकॉर्डेड नंबर, ई-मेल करें मान्य खाता खोलते समय बैंक ग्राहक का फोन नंबर और ई-मेल आईडी रजिस्टर करता है। बैंक से किसी भी ट्रांजेक्शन या निर्देश के लिए सिर्फ इसी नंबर या ई-मेल का इस्तेमाल होना चाहिए। अगर बैंक को ग्राहक के नाम पर कॉल आता है, तो अधिकृत नंबर या मेल से संपर्क करने का अनुरोध करें। वाट्सएप पर कोई भुगतान न करें। कस्टमर से चेक मंगवाएं। बैंक की पॉलिसी यही है। जिस अधिकारी से लापरवाही हुई, पैसा लौटाने की जिम्मेदारी उसी की है।- बैंक ग्राहक का पैसा चुका देगीविजय येचुरी, रिटायर एजीएम, स्टेट बैंक दिल्ली का गिरोह सक्रिय दिल्ली और आसपास के युवक क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड समेत कई बैंकिंग सेवाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं। बैंक का डाटा अक्सर निजी कंपनियों के माध्यम से लीक होता है। ठग आसानी से डेटा हासिल करते हैं और उसी के जरिए ठगी करते हैं। रायपुर पुलिस ने कई बार ऐसे गिरोह को पकड़ा है। इसमें ज्यादातर दिल्ली, यूपी और बिहार के युवक शामिल हैं।- संजय सिंह, डीएसपी क्राइम कारोबारी को लौटाना होगा पैसा ग्राहकों को साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए जागरूक करने की जिम्मेदारी बैंक की है, लेकिन अब बैंक खुद ठगी का शिकार हो रहा है। बैंक का डेटा किसी न किसी तरह लीक हो रहा है। डेटा लीक बैंक के कर्मचारी या बैंक द्वारा अनुबंधित निजी कंपनियों के माध्यम से हो रहा है। ठग इस डेटा का विश्लेषण कर बड़े ग्राहकों या खाताधारकों के नाम का उपयोग कर रहे हैं। वे बैंक को दिए गए लेटरहेड या चेक में छेड़छाड़ कर ठगी कर रहे हैं।- मुकेश चौधरी, साइबर क्राइम एक्सपर्ट

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