टीकमगढ़ में मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक के एक पूर्व कर्मचारी जिनेश कुमार जैन (कोठिया) को 41 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार न्याय मिल गया है। जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने उनकी बर्खास्तगी को रद्द करते हुए बैंक प्रबंधन को उनके सभी लंबित भुगतान और पेंशन जारी करने का आदेश दिया है। यह मामला 29 नवंबर 1984 का है, जब बैंक की मलगवां शाखा में जिनेश कुमार कोठिया पर शाखा प्रबंधक के साथ मिलकर धन गबन और जालसाजी का आरोप लगाया गया था। इन आरोपों के बाद दोनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था। बाद में, विभागीय जांच के आधार पर उन्हें 1991 में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। शिकायत करने पर बनाया आरोपी जिनेश कुमार कोठिया ने बताया कि उन्होंने ही 29 नवंबर 1984 को शाखा प्रबंधक एसपी गर्ग द्वारा किए गए गबन और जालसाजी की शिकायत टेलीफोन और लिखित रूप से बैंक प्रबंधन से की थी। हालांकि, बैंक प्रबंधन ने उन्हें भी सह-आरोपी मानते हुए निलंबित कर दिया। उन्होंने टीकमगढ़ जिला न्यायालय में अपने खिलाफ दर्ज मामले का सामना किया और 1998 में बरी हो गए। इसके बाद उन्होंने अपनी विभागीय जांच को सेंट्रल गवर्नमेंट इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल (CGIT) जबलपुर में चुनौती दी। 41 साल बाद मिला न्याय 41 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद, जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने जिनेश कुमार कोठिया के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए बैंक प्रबंधन को निर्देश दिया है कि जिनेश कुमार कोठिया के सभी लंबित भुगतान तुरंत जारी किए जाएं और उन्हें बैंक की ओर से पेंशन भी प्रदान की जाए। सिद्ध नहीं हो पाए आरोप बैंक प्रबंधन उन पर आरोप सिद्ध नहीं कर पाया। साल 2014 में ट्रिब्यूनल में कर्मचारी पर आरोप साबित नहीं हुए परिणाम स्वरूप कर्मचारी को 50 फीसदी बकाया वेतन के साथ पुनः पद स्थापना का आदेश दिया गया। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने हाई कोर्ट जबलपुर में याचिका दायर की। जिसे साल 2024 में हाई कोर्ट जबलपुर ने खारिज कर दिया और कर्मचारी को 1984 से वेतन भुगतान करने का ट्रिब्यूनल का आदेश बरकरार रखा। डबल बैंच में गया मामला इसके बाद बैंक प्रबंधन ने 2024 में हाईकोर्ट जबलपुर की डबल बेंच में रिट अपील दायर की थी। बैंक की रिट पर विचार करते हुए हाई कोर्ट की डबल बेंच ने दो दिन पहले बैंक कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है। बैंक प्रबंधन की अपील खारिज करते हुए अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा है कि विभागीय कार्रवाई और आपराधिक केस एक ही तथ्यों तथा साक्ष्यों पर आधारित थे। पहले हो चुके हैं बरी कर्मचारी क्रिमिनल केस में पहले ही बरी हो चुका था। इसलिए विभागीय कार्रवाई भी टिक नहीं सकती। बैंक विभागीय जांच या सीजीआईटी में आरोप साबित नहीं कर सका। हाई कोर्ट ने बैंक को आदेश देते हुए कहा है कि कर्मचारी के सभी सेवानिवृत और टर्मिनल लाभ तुरंत दिए जाएं। मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक सेवा निवृत एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष श्री रवि खरे टीकमगढ़ ने बताया कि माननीय हाई कोर्ट ने जिनेश कुमार कोठिया के साथ न्याय किया है। इससे समस्त बैंक कर्मचारियों में खुशी की लहर है। उन्होंने संगठन की ओर से हाई कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर की है।


