बैज बोले–नक्सलियों से शांति वार्ता सरकार का प्रोपेगेंडा तो नहीं:गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा – बिना शर्त ही होगी बातचीत

नक्सलियों द्वारा शांति वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि अगर नक्सलियों की ओर से ठोस निर्णय आया है, तो इस पर विचार किया जाना चाहिए, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि कहीं सरकार सिर्फ वाहवाही लूटने के लिए इसे प्रोपेगेंडा के रूप में तो इस्तेमाल नहीं कर रही? इधर, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसी भी सार्थक वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए कोई शर्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि यदि नक्सली वास्तव में मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, तो उन्हें अपने प्रतिनिधि और वार्ता की शर्तों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना होगा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से ठीक पहले नक्सलियों ने एक पत्र जारी कर संघर्ष विराम और शांति वार्ता की पेशकश की है। यह पत्र तेलुगू भाषा में जारी किया गया है, जिसमें सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति ने भारत सरकार से ऑपरेशन कागर को रोकने की अपील की है। पत्र में शांति वार्ता को लेकर कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। बैज ने कहा- सरकार को निर्णय लेना चाहिए दीपक बैज ने कहा कि नक्सली किस स्थिति में शांति वार्ता करना चाहते हैं, उनका असल मकसद क्या है, और बस्तर में शांति स्थापित करने के लिए क्या बेहतर हो सकता है – इस पर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को यह बताना होगा कि वह वार्ता को किस नजरिए से देख रही है और क्या यह सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश तो नहीं? विजय शर्मा – संविधान की मान्यता जरूरी उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने यह भी कहा कि वार्ता का स्वरूप किसी कट्टरपंथी विचारधारा की तर्ज पर नहीं हो सकता। अगर नक्सली वार्ता चाहते हैं, तो उन्हें भारतीय संविधान की मान्यता स्वीकार करनी होगी। उन्होंने साफ किया कि अगर नक्सली संविधान को नकारते हैं और समानांतर व्यवस्था थोपने की कोशिश करते हैं, तो वार्ता का कोई औचित्य नहीं रह जाता। ऑपरेशन कागर से बैकफुट पर नक्सली? नक्सलियों का यह पत्र तब आया है, जब प्रदेश में ऑपरेशन कगार के तहत सुरक्षा बलों ने कई बड़े नक्सली कैंपों को ध्वस्त किया है। लगातार दबाव के कारण अब माओवादी बातचीत की टेबल पर आने की बात कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ रणनीतिक चाल भी हो सकती है, ताकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर विराम लगे और नक्सली खुद को फिर से संगठित कर सकें। तेलुगू भाषा में भेजे गए पत्र को हिन्दी में ट्रांसलेट किया गया है….. नक्सलियों के शांति वार्ता प्रस्ताव में रखी गई शर्तें और आरोप नक्सलियों की शीर्ष इकाई सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति ने भारत सरकार को एक पत्र लिखकर संघर्ष विराम और शांति वार्ता की पेशकश की है। इस पत्र में ऑपरेशन कगार को तत्काल रोकने, सुरक्षा बलों की वापसी और वार्ता के लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं। शांति वार्ता और संघर्ष विराम की अपील ‘ऑपरेशन कागर’ पर आपत्ति मानवाधिकार हनन और हताहतों का आरोप शांति वार्ता के लिए नक्सलियों की शर्तें सुरक्षा बलों की तत्काल वापसी – माओवादी प्रभावित जनजातीय क्षेत्रों से।नए सैनिकों की तैनाती पर रोक – भविष्य में कोई सैन्य विस्तार न किया जाए।उग्रवाद विरोधी अभियानों को निलंबित किया जाए। सरकार पर आरोप माओवादियों की अपील – सरकार पर दबाव बनाया जाए वार्ता में शामिल होने की शर्तें

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