बैतूल जिले में ताप्ती नदी पर बने दो बड़े बांधों के कारण निचले क्षेत्रों में पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। पानी की कमी से फसलें सूख रही हैं और पशुपालन पर भी संकट मंडरा रहा है। मंगलवार को बैतूल में आयोजित जनसुनवाई में किसानों ने कलेक्टर से इस समस्या के तत्काल समाधान की मांग की। जनसुनवाई में सिमोरी, सोनाझाम, कोटमी, डोक्या, बरेठा, धामन्या, उती, जामू, गोरखीढाना, आमढाना, गौलागोंदी और मलियाढाना सहित कई गांवों के किसानों ने अपनी समस्या बताई। उन्होंने कहा कि ताप्ती नदी सूखने से पशुओं के लिए भी पानी की भारी किल्लत है। किसानों ने पारसडोह बांध से कुछ मात्रा में पानी छोड़ने की मांग की, ताकि निचले गांवों के किसानों और पशुओं को राहत मिल सके। पूर्व विधायक बोले- पशुधन को बचाने का संकट हो जाएगा
पूर्व विधायक धरमू सिंह सिरसाम और किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रशांत राजपूत हर्ष वर्धन धोटे ने भी किसानों की समस्या को गंभीर बताया। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते पानी नहीं छोड़ा गया और बांधों की मरम्मत नहीं हुई, तो किसानों के सामने फसलों और पशुधन को बचाने का संकट खड़ा हो जाएगा। इसी बीच, मुलताई तहसील के ग्राम सुकाखेड़ी और निरगुड़ के किसानों ने चन्नीमन्नी बांध की समस्या उठाई। उन्होंने बताया कि 2011-12 में बने इस बांध में शुरुआत से ही रिसाव की समस्या है, जिसके कारण यह भरने के कुछ ही दिनों में खाली हो जाता है। किसानों के अनुसार, सिंचाई विभाग को कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन न तो जांच हुई और न ही मरम्मत का कोई काम। लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद किसानों को इस बांध का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। खेतों में पानी न पहुंचने से फसलें सूख रही हैं और किसान नुकसान झेल रहे हैं। किसानों ने यह भी शिकायत की कि सिंचाई के लिए पानी न मिलने के बावजूद उनसे सिंचाई और बिजली के बिल वसूले जा रहे हैं। उन्होंने चन्नीमन्नी बांध की तत्काल मरम्मत की मांग की है।


