बैतूल में मां शारदा सहायता समिति ने ‘बालहठ-रक्तदान की जिद’ नाम से एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य समाज में रक्तदान की भावना को बढ़ावा देना और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों की मदद करना है। यह अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नैतिकता, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक कल्याण के मूल भाव से प्रेरित है। ‘बालहठ’ का अर्थ बच्चों की मासूम जिद और दृढ़ इच्छाशक्ति से है। संस्था ने इसी सकारात्मक जिद को सामाजिक जागरूकता का माध्यम बनाया है। अभियान के तहत जिले के कई स्कूलों में पत्र लेखन गतिविधियां आयोजित की गईं, जहां छात्रों ने अपने माता-पिता को भावनात्मक पत्र लिखकर रक्तदान करने की अपील की। बच्चों ने अपने पत्रों में लिखा है कि जिस तरह माता-पिता ने उन्हें जीवन और पालन-पोषण दिया है, उसी तरह वे भी किसी अन्य जरूरतमंद को जीवनदान दें। उन्होंने बताया कि बैतूल जिले में थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारियों से सैकड़ों बच्चे पीड़ित हैं, जिन्हें हर माह रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। कई बार ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध नहीं होता, जिससे इन परिवारों को परेशानी झेलनी पड़ती है। बच्चों ने अपने पत्रों में यह भी बताया कि रक्तदान से किसी घर का बुझता चिराग फिर से रोशन हो सकता है। संस्था के सदस्यों भरत सूर्यवंशी, महेंद्र मालवीय, निमिष मालवीय, डॉ. सागर बिंझाड़े और प्रकाश बंजारे ने बताया कि अभियान के पहले ही दिन हजारों बच्चों ने अपने परिवारों को संबोधित करते हुए पत्र लिखे हैं। इन पत्रों ने अभिभावकों को गहराई से प्रभावित किया है। अभियान का उद्देश्य है कि रक्तदान का संदेश हर घर तक पहुंचे और समाज में इसके प्रति नई चेतना जागे। संस्था के सुनील सलूजा, शैलेंद्र बिहारिया, अध्यक्ष हिमांशु सोनी और अनंत तिवारी ने बताया कि प्रत्येक स्कूल में सर्वश्रेष्ठ पत्र लेखक को पुरस्कार दिए जाएंगे, ताकि बच्चों का उत्साह बढ़ाया जा सके। महिला अध्यक्ष हेमासिंह चौहान और सचिव दीपा मालवीय ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान में शामिल होकर रक्तदान करें और किसी मासूम को नया जीवन प्रदान करें।


