बॉक्सिंग में गोल्ड जीतने वाली मीनाक्षी की कहानी:पिता घर से निकलने से मना करते, छुपकर जाती थीं स्टेडियम, मां ने दूध बेचकर किया सपोर्ट

रोहतक के गांव रूड़की की मीनाक्षी हुड्डा ने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीतकर गांव, प्रदेश और पूरे देश का मान बढ़ाया है। मीनाक्षी एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता श्रीकृष्ण हुड्डा ऑटो चलाते हैं और मां सुनीता देवी गृहिणी हैं, जो दूध बेचकर घर का खर्चा चलाती हैं। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी मीनाक्षी आज पूरे देश का गर्व बन गई हैं। उनकी जीत से गांव में भी जश्न और खुशी का माहौल है। पिता करते थे मना, लेकिन बेटी पर विश्वास
मां सुनीता देवी ने बताया कि शुरुआत में मीनाक्षी के पिता मना करते थे कि बेटी को बाहर नहीं भेजना। गांव वालों के प्रेशर में आकर हमेशा मना करते थे। लेकिन उन्हें बेटी पर विश्वास था कि एक दिन बेटी उनका नाम रोशन करेगी और बेटी के मन में जो इच्छा है, उसे पूरा करना चाहिए। सुनीता देवी ने बताया कि जब मीनाक्षी के पिता श्रीकृष्ण हुड्डा काम पर जाते, तो पीछे से मीनाक्षी प्रैक्टिस करने के लिए स्टेडियम चली जाती। शुरुआत के करीब 4 महीने तक ऐसा ही चलता रहा। उसके बाद जब मीनाक्षी के पिता को पता चला तो काफी गुस्सा किया, लेकिन बाद में कोच विजय हुड्डा व उनके कहने पर मीनाक्षी के पिता मान गए। मां पशु रखे और दूध बेचकर अपने घर का गुजारा करती
मीनाक्षी की मां सुनीता देवी ने बताया कि शादी के बाद उन्होंने घर संभालने के साथ-साथ पशु पाले और दूध बेचकर परिवार का गुजारा किया। बड़ी बेटियों की शादी हो चुकी थी, लेकिन सबसे छोटी मीनाक्षी के लिए उन्होंने अलग सपने देखे। मीनाक्षी खेलों में आगे बढ़ना चाहती थी, इसलिए मां ने उसे प्रोत्साहित किया। शुरुआत में मीनाक्षी ने हैंडबॉल खेला, लेकिन बॉक्सिंग में हाथ आजमाने के बाद उसने ठान लिया कि वही करेगी। इसके बाद उसने बॉक्सिंग को ही अपना पैशन बना लिया और चैंपियनशिप से पहले दिन में तीन बार कड़ी प्रैक्टिस की। सुनीता देवी बताती हैं कि जब मीनाक्षी पहली बार मेडल जीतकर आई तो लोगों की सोच बदलने लगी। उसके बाद पिता श्रीकृष्ण हुड्डा ने भी पूरी तरह उसका साथ देना शुरू किया। ग्रामीणों की बातों की परवाह न करते हुए उन्होंने मीनाक्षी को बाहर खेलने भेजा और आज उसकी मेहनत और जीत से पूरा परिवार और गांव गर्व महसूस कर रहा है। किराए का ऑटो चलाकर घर का गुजारा किया
मीनाक्षी के पिता श्रीकृष्ण हुड्डा ने कहा कि वह 30 साल से किराए पर ऑटो लेकर चला रहे हैं। 2022 में बेटी मीनाक्षी भारतीय तिब्बत पुलिस में नौकरी लगी तो बेटी ने ही पुराना ऑटो खरीदकर उसे दिया था। जब मीनाक्षी पहली बार बॉक्सिंग के लिए खेलने गई तो ग्रामीणों ने काफी एतराज किया। श्रीकृष्ण हुड्डा ने कहा कि ग्रामीण कहते कि बेटी को कहां खेलने भेज रहे हो, यह क्या करेगी। नाक तुड़वा लेगी, फिर शादी कैसे होगी। बेटी को बाहर मत भेज, लेकिन उन्होंने ग्रामीणों की परवाह नहीं की और बेटी को चैंपियनशिप के लिए भेजते रहे। श्रीकृष्ण हुड्डा ने कहा कि मीनाक्षी ने अनेक प्रतियोगिताओं में मेडल हासिल किए और जो लोग मीनाक्षी के खेलने का विरोध करते थे, बाद में वो उसकी तारीफ करने लगे। जब मीनाक्षी कर कल फाइनल मुकाबला था तो वह देख नहीं पाए और ऑटो चला रहे थे। करीब 5 बजे बेटे का फोन आया कि मीनाक्षी जीत गई। इसके बाद वह भावुक हो गए और खुशी के मारे घर की तरफ चल पड़े। मीनाक्षी ने वर्ल्ड चैंपियन बनने तक किया काफी संघर्ष
मीनाक्षी के बड़े भाई रोहित हुड्डा ने बताया कि मीनाक्षी का वर्ल्ड चैंपियन बनने तक का सफर आसान नहीं था। 2013 में पहली बार मीनाक्षी बॉक्सिंग रिंग में प्रैक्टिस के लिए उतरी। जब प्रैक्टिस करने जाती तो लोग ताने भी मारते, लेकिन कभी उसकी परवाह नहीं की। लगातार प्रैक्टिस करती रही और कहती कि एक दिन ये सब उसके खेल की वजह से ही तारीफ करेंगे। रोहित ने बताया कि मीनाक्षी अकेले ही प्रैक्टिस करने स्टेडियम जाती थी। कुछ दिन रोहतक के साई स्टेडियम में भी प्रैक्टिस की। लेकिन ज्यादातर मीनाक्षी स्टेडियम में ही प्रैक्टिस करती थी। रोहित ने बताया कि पिछले चार महीने से मीनाक्षी बाहर ही है और चैंपियनशिप की तैयारी कर रही है। ग्रामीणों ने बधाई दी
रोहित ने बताया कि मीनाक्षी करीब 3 महीने पटियाला में चल रहे नेशनल कैंप में प्रैक्टिस करती रही और उसके बाद वहीं से सीधे पिछले महीने इंग्लैंड चली गई। करीब एक महीने से इंग्लैंड में ही प्रैक्टिस कर रही है। जब मीनाक्षी ने फाइनल में अपनी बाउट जीती तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और ग्रामीणों ने भी उन्हें बधाई दी।

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