क्राइम फाइल्स के पहले पार्ट में आपने पढ़ा कि मझगवां और कूम्हीं परसेल को जोड़ने वाली सुनसान सड़क पर 25 सितंबर 2022 को पुलिस को एक युवक की लाश मिली थी। युवक की शिनाख्त पास ही के गांव के आशीष चौधरी के रूप में हुई थी। वह एक दिन पहले ही अपने ससुराल में किसी काम से गया था, लेकिन घर वापस नहीं लौटा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आशीष की सिर कुचलकर हत्या की गई थी। पुलिस को ये भी पता चला कि आशीष ने अपनी पत्नी को गांव के ही एक और युवक के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था। मामले की जांच की दिशा तब पूरी तरह बदल गई, जब आशीष के घर के किचन से एक सीक्रेट मोबाइल फोन मिला, जिसे उसकी पत्नी साधना ने छिपाकर रखा था। इस फोन से एक ही नंबर पर बार-बार बात की गई थी। अब सवाल यह था कि साधना किससे बात कर रही थी और उसने यह फोन क्यों छिपाया? क्या आशीष की मौत का राज इसी फोन में दफन था? पढ़िए पार्ट-2… रिवर्स इन्वेस्टिगेशन में मिला अहम सुराग
हत्या की पुष्टि होते ही जबलपुर पुलिस ने ‘रिवर्स इन्वेस्टिगेशन’ का रास्ता अपनाया। पुलिस ने आशीष के चाचा जय से दोबारा गहराई से पूछताछ की। इस बार जय ने एक ऐसी जानकारी दी, जो केस का रुख मोड़ने वाली थी। उसने बताया कि घटना वाली शाम करीब 7 बजे उसने आशीष को कुम्ही शराब की दुकान के पास गांव के ही दो युवकों, धर्मेंद्र पटेल और अमित पटेल के साथ देखा था। जय के अनुसार, ‘तीनों कुछ देर बात करते रहे, फिर मेरा भतीजा आशीष अपनी बाइक पर था और धर्मेंद्र व अमित दूसरी बाइक पर। वे तीनों आशीष को अपने साथ परसेल की तरफ ले गए थे।’ यह एक बहुत बड़ा सुराग था। पुलिस ने फौरन वाइन शॉप के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। फुटेज में चाचा जय की बात सच साबित हुई। पुलिस ने बिना देर किए दोनों के मोबाइल फोन की लोकेशन हिस्ट्री निकाली। डिजिटल सबूतों ने शक को और पुख्ता कर दिया। घटना के समय, दोनों की लोकेशन आशीष के फोन की लोकेशन के साथ हूबहू मैच हो रही थी। आखिरी बार उन्हें आशीष के साथ ही देखा गया था, इसलिए पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ शुरू की। शुरुआत में वे कहानी गढ़ते रहे, लेकिन पुलिस के सवालों और सबूतों के सामने वे ज्यादा देर टिक नहीं सके और आखिरकार उन्होंने आशीष की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया। मगर, पुलिस के सामने एक और बड़ा सवाल खड़ा था-जिन दोस्तों के साथ आशीष शराब पार्टी कर रहा था, आखिर उन्होंने ही उसे इतनी बेरहमी से क्यों मार डाला? हत्या का मकसद क्या था? किचन में छिपा राज और एक नाजायज रिश्ते का खुलासा
जब उस फोन में लगी सिम की डिटेल निकाली गई, तो केस की पूरी तस्वीर शीशे की तरह साफ हो गई। वह सिम धर्मेंद्र पटेल के नाम पर रजिस्टर्ड थी। और जिस नंबर पर उस फोन से लगातार बात होती थी, वह नंबर भी धर्मेंद्र का ही था। पुलिस ने जब यह सबूत साधना के सामने रखे, तो उसके पास कोई जवाब नहीं था। उसका चेहरा सफेद पड़ चुका था। यह साफ हो गया था कि धर्मेंद्र और साधना के बीच अवैध प्रेम संबंध थे। जांच में पता चला कि धर्मेंद्र, जो आशीष के ही गांव का था, उसका आशीष के घर अक्सर आना-जाना था। इसी दौरान, पिछले 3-4 सालों से उसके और आशीष की पत्नी साधना के बीच अफेयर चल रहा था। साधना से चोरी-छिपे बात करने के लिए धर्मेंद्र ने ही उसे यह दूसरा फोन खरीदकर दिया था। इस फोन में जो सिम कार्ड था वो उसने अपनी आईडी से खरीदा था। साधना अक्सर किचन में या घर के किसी कोने में छिपकर धर्मेंद्र से बात किया करती थी। कुछ समय पहले आशीष को उनके रिश्ते की भनक लग गई थी। इस बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होने लगे थे। आशीष, साधना को प्रताड़ित करने लगा था। लेकिन यह बात घर के बाकी सदस्यों से छिपी हुई थी। सिलसिलेवार जानिए कैसे रची गई हत्या की साजिश
धर्मेंद्र ने पुलिस को दिए अपने कबूलनामे में पूरी साजिश का पर्दाफाश किया। उसने बताया कि मेरे और साधना के बीच 3-4 साल से प्रेम संबंध थे। आशीष को जब यह पता चला, तो वह साधना को आए दिन परेशान करने लगा था। पिछले 15-20 दिनों से साधना मुझ पर दबाव बना रही थी कि आशीष को जान से खत्म कर देते हैं, ताकि हमारे बीच की बाधा हमेशा के लिए हट जाए। साजिश का दिन: 24 सितंबर 2022 को आशीष काम के सिलसिले में अपने ससुराल पिंडरई गया हुआ था। इसी दिन साधना ने धर्मेंद्र को फोन किया और कहा, ‘जब यह लौटकर आने लगेगा, तो मैं तुम्हें बता दूंगी। तुम उसे शराब पिलाने के बहाने कहीं ले जाना और वहीं जान से मार देना। घटना ऐसी लगनी चाहिए जैसे कोई एक्सीडेंट हो। शराब पिलाकर हत्या का प्लान: योजना के मुताबिक, 24 तारीख की शाम करीब 6 बजे धर्मेंद्र ने आशीष और अपने एक और दोस्त अमित पटेल को फोन कर कुम्ही शराब दुकान पर बुलाया। धर्मेंद्र अपनी बाइक से वहां पहुंचा और आशीष को दोबारा फोन किया। कुछ ही देर में अमित भी आ गया। धर्मेंद्र ने आशीष को 500 रुपए देकर शराब, अंडे, गिलास और पानी की बोतल लाने को कहा। हत्या की आखिरी योजना: कुछ देर बाद शराब खत्म हो गई। आशीष के पास जो पैसे बचे थे, उनसे दो और बोतल लाने के लिए वह दोबारा अपनी बाइक से शराब दुकान चला गया। यही वह पल था जब हत्या की अंतिम योजना बनी। आशीष के जाते ही धर्मेंद्र और अमित ने तय किया कि जब वह लौटेगा, तो उसे और शराब पिलाकर पूरी तरह नशे में धुत कर देंगे। इसके बाद पास पड़े पत्थरों से उसका सिर कुचलकर हत्या कर देंगे और शव व बाइक को पास के गड्ढे में धकेल देंगे, ताकि सब कुछ एक सड़क हादसा लगे। दोनों ने पास से एक-एक भारी पत्थर उठाकर अपने पास रख लिया और आशीष का इंतजार करने लगे। जब आशीष शराब लेकर लौटा, तो दोनों ने उसे जानबूझकर ज्यादा शराब पिलाई। इसके बाद प्लानिंग के मुताबिक उसके सिर पर वार किए। सबूत मिटाने की कोशिश और एक फोन कॉल
हत्या के बाद, दोनों ने मिलकर आशीष के शव को पास के गड्ढे में धकेल दिया। फिर अमित ने आशीष की मोटरसाइकिल को भी उसी गड्ढे में फेंक दिया ताकि एक्सीडेंट का सीन बन सके। घटना में इस्तेमाल किए गए खून लगे पत्थर भी वहीं फेंक दिए। इसके बाद दोनों अपनी बाइक से गांव की ओर लौट गए। रास्ते में हिरन नदी के पुल पर रुककर धर्मेंद्र ने आशीष का मोबाइल फोन नदी में फेंक दिया, ताकि कोई डिजिटल सबूत बाकी न रहे। गांव पहुंचकर दोनों ऐसे अपने-अपने घर चले गए, जैसे कुछ हुआ ही न हो। इसके बाद धर्मेंद्र ने साधना को फोन कर बताया कि आशीष सिर्फ तीन शब्द कहे- “तुम्हारा काम कर दिया है।” इंसाफ का दिन: तीनों को मिली उम्रकैद
जबलपुर पुलिस ने करीब तीन महीने की गहन जांच, डिजिटल सबूतों, गवाहों के बयानों और आरोपियों के कबूलनामे के आधार पर इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझा लिया। पुलिस ने आशीष की पत्नी साधना, उसके प्रेमी धर्मेंद्र पटेल और दोस्त अमित पटेल के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश रचने और सबूत मिटाने की धाराओं में केस दर्ज कर कोर्ट में चार्जशीट दायर की। यह केस जबलपुर जिला कोर्ट में करीब तीन साल तक चला। तमाम सबूतों और गवाहों को सुनने के बाद, 27 जून 2025 को कोर्ट ने तीनों को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने इसे एक जघन्य अपराध मानते हुए साधना, धर्मेंद्र और अमित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एक हादसा दिखने वाली मौत के पीछे छिपे धोखे और साजिश का अंत आखिरकार सलाखों के पीछे हुआ। क्राइम फाइल्स पार्ट-1 भी पढ़ें…
पति ने पत्नी को प्रेमी संग रंगरेलिया मनाते पकड़ा रात का अंधेरा जब सुबह की पहली किरण से छंटने लगता है, तो अक्सर अपने साथ नई उम्मीदें लेकर आता है। लेकिन 25 सितंबर 2022 की सुबह जबलपुर के मझगवां इलाके के लिए एक सनसनीखेज खबर लेकर आई। मझगवां और कूम्हीं परसेल को जोड़ने वाली सुनसान सड़क पर, क्रूर बाबा स्थान के पास लोगों की भीड़ जमा होने लगी थी। पढ़ें पूरी खबर…


