बॉर्डर एरिया में 500 से ज्यादा पशुओं की मौत:बकरियों-भेड़ों में फैला फड़किया रोग, टीकों से भी नहीं बच रहे पशु

जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्र की तनोट पंचायत में इन दिनों पशुओं में फैली फड़किया बीमारी से करीब 500 पशुओं की मौत हो चुकी है। हालांकि पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं में टीकाकरण भी किया गया, मगर पशुओं के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
भारत-पाक सीमा स्थित तनोट ग्राम पंचायत के कई गांवों में फैले इस रोग की वजह से बकरियों और भेड़ों के मरने का सिलसिला जारी है। इस बीमारी में भेड़-बकरी के साथ इनके छोटे बच्चों की भी मौत हो रही है। अब ये बीमारी छोटे पशुओं में फैल रही है। ग्रामीण गोविंद सिंह ने बताया- ये बीमारी तेजी से फैल रही है। इसमें संक्रमित पशु 2 दिन तक पीड़ित रहने के बाद मौत के मुंह में चला जाता है। एक दिन में 10 तक पशुओं की एक साथ मौत हो रही है, जिसकी दर प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। अगर समय पर इस बीमारी पर काबू नहीं पाया तो यह पशु बाहुल्य क्षेत्र पशु धन रहित क्षेत्र हो जाएगा। अब तक 500 से ज्यादा पशुओं की हुई मौत
ग्रामीणों के अनुसार तनोट ग्राम पंचायत के गोधुवाला, दोसुवाला, कुरिया बेरी, किशनगढ़, घंटीयाली, तनोट व नत्थुवाला आदि गांवों में इन दिनों पशुओं में फड़किया रोग का प्रकोप जारी है। पिछले 15 दिनों में ही करीब 500 से भी ज्यादा पशुओं की मौत हो चुकी है। यहां के 90 फीसदी परिवारों की आजीविका भी इस पशुधन पर ही आधारित है। इन गरीबों के पास न तो कृषि योग्य भूमि है ना ही कोई नौकरी। इस कारण ये पशुपालक अपनी रोजी रोटी पर आए खतरे को देखकर काफी चिंतित हैं। टीकाकरण के बाद भी नहीं रुका मौत का सिलसिला
यहां के पशुपालकों ने इससे बचाव के लिए तरह तरह के उपाय किए पर सबके नाकाम साबित हो रहें है। पशुपालक फड़किया बीमारी एवं पीपीआर नामक दवां का टीकाकरण किया, लेकिन इस बीमारी पर कोई असर नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने सरकार से इस बीमारी पर रोकथाम एवं मृतक पशुधन के गरीब मालिकों को आर्थिक सहायता दिलाने जाने की मांग की है। गोविंद सिंह ने बताया कि इन गांवों के चन्दन सिंह, मेहताब सिंह, शोभ सिंह, गणपत सिंह, नवाब खान, फकीरे खान, यारू खान नामक कई पशुपालकों के पशुओं कि इस बीमारी से मौत हो चुकी है। अगर समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया तो पशुपालकों के पास पशु ही नहीं बचेंगे। क्या है फ़ड़किया बीमारी भेड़ और बकरियों में होने वाली एक प्रमुख और जानलेवा बीमारी है। यह बीमारी मुख्य रूप से जुलाई-अगस्त के महीने में होती है। फ़ड़किया बीमारी के लक्षण में, पेट में तेज़ दर्द होना, बेचैनी और उछलने-कूदने लगना, आफ़रा और मांसपेशियों में खिंचाव आना प्रमुख है। इस बीमारी से बचने के लिए, पशुओं को हर छह महीने में टीका लगवाना चाहिए। पशु के मुंह में फ़िटकरी और खुरों पर नीले थोथे का घोल लगाने से भी आराम मिलता है।

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