प्रोजेक्ट चीता के तहत साल के अंत तक बोत्सवाना से 8 से 10 चीते भारत लाए जाएंगे। फिलहाल, नामीबिया और केन्या से भी बातचीत चल रही है, लेकिन बोत्सवाना के साथ वन विभाग के अधिकारियों के बीच लगभग सहमति बन चुकी है। इन चीतों को कूनो नेशनल पार्क, गांधीसागर, नौरादेही या गुजरात के बन्नी घास मैदान में छोड़ा जा सकता है। अभी भारत में कुल 27 चीते वर्तमान में भारत में कुल 27 चीते हैं, जिनमें से 11 नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए हैं, जबकि 16 का जन्म भारत में हुआ है। अभी 24 चीते श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क के 748 वर्ग किमी के कोर क्षेत्र में खुले में घूम रहे हैं। यह क्षेत्र 3,500 वर्ग किमी के बड़े चीता-उपयुक्त परिदृश्य का हिस्सा है। 1952 में भारत से विलुप्त हो गई भारत में चीतों के जीवित रहने की दर उत्साह जनक रही है। शावकों की जीवित रहने की दर 61.05% है, जो वैश्विक औसत 40% से कहीं अधिक है। वयस्क चीतों की जीवित रहने की दर भी 85.71% है। यह प्रजाति 1952 में भारत से विलुप्त हो गई थी। गांधीसागर भी शिफ्ट किए गए इसी क्रम में 18 सितंबर को ‘धीरा’ नाम की एक मादा चीता को कूनो से मंदसौर के गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में शिफ्ट किया गया है। लगभग 7.5 साल की धीरा को विशेष एयरकंडीशन वाहन से सात घंटे की यात्रा कराकर वहां पहुंचाया गया। यहां भी अब चीतों का परिवार बढ़ाने के लिए नर और मादा चीतों के बीच मेटिंग के प्रयास किए जा रहे हैं। अभी गांधी सागर में तीन चीतें हैं।


