प्रदेश के छात्रों को ‘हुनरमंद’ बनाने वाली स्किल यूनिवर्सिटी 8 साल से बिना बोर्ड आफ मैनेजमेंट (बोम) का गठन हुए ही चल रही है। पहले सरकार ने इस यूनिवर्सिटी के एक्ट में अमेंडमेंट करने का हवाला दिया, फिर 2023 में अमेंडमेंट कर भी दिया। इसके बावजूद हालात जस के तस हैं। आजतक सरकार ने यूनिवर्सिटी में खुद के नॉमिनी तक नियुक्त नहीं किए हैं। इस वजह से यूनिवर्सिटी में परमानेंट कुलपति की नियुक्ति भी अटकी हुई है। जानकारी के अनुसार अब यूनिवर्सिटी बिना सरकार के नॉमिनी के ही फरवरी में बोम की पहली बैठक कराने की तैयारी कर रही है। अग्रणी विवि के रूप में चर्चा की गई, लेकिन यूनिवर्सिटी में शासन-प्रशासन ठप बीजेपी सरकार के समय कौशल नियोजन व उद्यमिता विभाग के तहत इस यूनिवर्सिटी का एक्ट 2017 में पास हुआ था। तथा कौशल शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी विश्वविद्यालय के रूप में इसकी चर्चा थी, लेकिन एक्ट में कुलपति की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं थे। सरकार ने प्रथम कुलपति पूर्व आईएएस ललित के पंवार को नियुक्त किया। पंवार का कार्यकाल 2020 में खत्म हो गया। यूनिवर्सिटी में एक भी परमानेंट स्टाफ नहीं; स्किल यूनिवर्सिटी से वर्तमान में प्रदेश के 40 संस्थान एफिलिएटेड है, जिनमें 3500 से ज्यादा छात्र स्किल डवलपमेंट कोर्स कर रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा यूनिवर्सिटी की सुध नहीं लेने के कारण इसमें एक भी परमानेंट स्टाफ नहीं है इसके बाद से यूनिवर्सिटी कार्यवाहक कुलपति के भरोसे ही चल रही है। इसमें ओम थानवी, जेपी यादव, राजीव जैन और वर्तमान में डॉ. देव स्वरूप कार्यवाहक कुलपति के रूप में लगे हैं। एक्ट में संशोधन के बाद भी नहीं की नॉमिनी की नियुक्ति गौरतलब है कि 2023 में विधानसभा में इस यूनिवर्सिटी के एक्ट में बदलाव किया गया। इसका नाम राजस्थान आईएलडी स्किल यूनिवर्सिटी से बदलकर विश्वकर्मा स्किल्स यूनिवर्सिटी कर दिया गया। इसके अलावा यूनिवर्सिटी में नॉमिनी की नियुक्ति के प्रावधान बदल दिए गए हैं। वहीं इसका एक्ट प्रदेश के अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों की तर्ज पर तैयार किया गया, लेकिन अभी तक नॉमिनी की नियुक्ति नहीं की गई। यूनिवर्सिटी को चौंप में 24 एकड़ जमीन दी गई है, हालांकि अभी काम भी शुरू नहीं हुआ है।


