ब्यावर के ऐतिहासिक बादशाह मेले के दौरान बादशाह बने शहर के प्रतिष्ठित नागरिक चंद्रप्रकाश अग्रवाल उर्फ चंदु भाई का हार्ट अटैक से निधन हो गया था। इस घटना से शहर में शोक व्याप्त हो गया। चंद्रप्रकाश अग्रवाल के आकस्मिक निधन से उनके परिजन गहरे सदमे में हैं। बुधवार से ही शहर के लोग और शुभचिंतक उनके निवास पर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दे रहे थे। गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे परिवार के सभी सदस्यों के पहुंचने के बाद दिवंगत अग्रवाल की अंतिम यात्रा उनके निवास स्थान से ट्रैक्टर में शुरू हुई। अंतिम यात्रा से पहले जिला कलेक्टर कमलराम मीणा और जिला पुलिस अधीक्षक रतन सिंह ने प्रशासन की ओर से पुष्पहार अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। शहर के विभिन्न समाजों, व्यापारिक संगठनों और गणमान्य नागरिकों ने भी पुष्पहार चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बादशाह मेला समिति के सभी सदस्य भी चंद्रप्रकाश अग्रवाल के निवास पर मौजूद रहे और परिजनों को सांत्वना दी। शहर में चंद्रप्रकाश अग्रवाल को एक नेकदिल और मिलनसार व्यक्ति के रूप में याद किया जा रहा है। दिवंगत आत्मा की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। ‘बीरबल’ की भूमिका निभा रहे मुकेश उपाध्याय ने भी शॉल ओढ़ाकर और पुष्पवर्षा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शहर के विभिन्न बाजारों से गुजरती हुई शव यात्रा के दौरान कई स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर उन्हें अंतिम विदाई दी।
विभिन्न समाजों के साथ-साथ मुस्लिम समाज के लोगों ने भी पुष्पहार अर्पित कर दिवंगत आत्मा की शांति और जन्नत की दुआ की, जिससे शहर की गंगा-जमुनी संस्कृति की झलक देखने को मिली।
शव यात्रा शहर के प्रमुख बाजारों से होती हुई मुक्तिधाम पहुंची, जहां उनके पार्थिव शरीर से पुष्पहार और शॉल हटाने के बाद उनके पुत्र ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। इस दौरान उनके पिता, छोटे भाई, परिजन, समाज के लोग और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
अंतिम यात्रा के दौरान बादशाह मेला समिति और युवाओं ने नारे लगाते हुए कहा- “जब तक सूरज चांद रहेगा, चंदु तेरा नाम रहेगा।”
ब्यावर के ऐतिहासिक बादशाह मेले के दौरान घटी यह घटना अपने आप में एक अनोखी और भावुक कर देने वाली घटना बन गई, जो लंबे समय तक शहर के इतिहास में याद की जाती रहेगी।


