ब्यावर जिला कोर्ट परिसर स्थित अधिवक्ता सभागार में मंगलवार को एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अधिवक्ता परिषद राजस्थान, चित्तौड़ प्रांत की जिला न्यायालय इकाई ब्यावर ने राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर यह संगोष्ठी आयोजित की। इसका मुख्य विषय ‘न्याय की खोज: युवा अधिवक्ताओं की भूमिका’ था। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता और स्वामी विवेकानंद के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर ब्यावर के उपखंड अधिकारी दिव्यांश सिंह (आईएएस) मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता रहे। अजमेर के लोक अभियोजक जयप्रकाश शर्मा विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में उपस्थित थे। प्रांत कोषाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान, इकाई अध्यक्ष नरपत सिंह रावत, बार एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश प्रजापति और स्थानीय इकाई कोषाध्यक्ष माधुरी टांक भी मंच पर मौजूद थे। अतिथियों का स्वागत उपरना पहनाकर किया गया और वंदे मातरम् का सामूहिक गायन हुआ। इकाई अध्यक्ष नरपत सिंह रावत ने स्वागत भाषण में युवा अधिवक्ताओं से न्याय के मूल सिद्धांतों को अपनाने का आह्वान किया। अधिवक्ता रामस्वरूप सेवलिया ने न्यायप्रियता और नैतिक मूल्यों के पालन पर जोर दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता सूर्यकांत चौधरी ने सीनियर-जूनियर के भेदभाव को खत्म कर लक्ष्य निर्धारित करने की बात कही। बार अध्यक्ष राकेश प्रजापति ने स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन में उतारने का संदेश दिया। लोक अभियोजक जयप्रकाश शर्मा ने अधिवक्ता परिषद की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से न्याय की निरंतर खोज में सक्रिय रहने और स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेने का आग्रह किया। मुख्य वक्ता दिव्यांश सिंह ने कहा कि मजिस्ट्रेट के निर्णय वरिष्ठता या कनिष्ठता पर आधारित नहीं होते, बल्कि प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजों और अधिवक्ता की प्रभावी पैरवी पर निर्भर करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि सच्चा न्याय गरीब और वंचित वर्ग को निःशुल्क न्याय दिलाने में है, जिसमें युवा अधिवक्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।


