डीग जिले के खोह कस्बे में ब्रज क्षेत्र में अवैध खनन के विरोध में साधु-संतों और ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि निरंतर खनन गतिविधियों से धार्मिक स्थलों और पौराणिक महत्व के पर्वतों के अस्तित्व पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। हरि बोल बाबा और भूरा बाबा के सानिध्य में हो रहे इस प्रदर्शन में तहसील पहाड़ी, नगर और सीकरी क्षेत्र में वैध-अवैध खनन से पहाड़ियों के विनाश पर चिंता व्यक्त की गई। स्थानीय नागरिकों और खोह क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से ब्रज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को हो रही क्षति को रोकने का आग्रह किया। खनन पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ब्रज क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली तहसील नगर, सीकरी और पहाड़ी को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया जाए। साथ ही, संपूर्ण ब्रज मंडल में वैध एवं अवैध खनन गतिविधियों पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा-कृष्ण की लीला स्थलों के आसपास खनन कार्य लगातार जारी है, जिससे इन तीर्थ स्थलों का स्वरूप नष्ट हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो इन पवित्र तीर्थों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। कई इलाकों में अवैध खनन की शिकायतें
वर्तमान में डीग तहसील के धमारी, सेऊ, मोनाका, अलीपुर, जटेरी, अडावली, अंजारी और कामां तहसील के घाटा, मुल्लाका, सुनहरा, लेवड़ा, कनवाड़ी, विलग, हजारीवास, गड़ाजान, बौलखेड़ा, चरण पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध खनन की शिकायतें सामने आई हैं। इसके अतिरिक्त, पहाड़ी तहसील में नांगल, छपरा गंगोरा, बिजसना; सीकरी तहसील में लहरवाड़ा, सेबल मंदिर के पास, निहाम बूड़ली; तथा नगर तहसील में रसीया, दुदावल, ककड़ा, पूँछरी सहित अनेक गांवों में भी खनन गतिविधियां जारी हैं। बताया गया है कि इन क्षेत्रों में जेसीबी, पोकलेन मशीनों और हाथों से लगातार अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण के साथ-साथ धार्मिक आस्था को भी गहरा आघात पहुंच रहा है।


