ब्राह्मण समाज के अपमान पर उबाल:’घूसखोर पंडित’ फिल्म के विरोध, विप्र फाउंडेशन ने जताया कड़ा ऐतराज, फिल्म पर प्रतिबंध और निर्माताओं पर कार्रवाई की मांग

ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर प्रस्तावित फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के विवादास्पद और अपमानजनक शीर्षक को लेकर ब्राह्मण समाज में भारी रोष व्याप्त है। इस फिल्म के माध्यम से समाज की छवि धूमिल करने के प्रयासों के खिलाफ विप्र फाउंडेशन ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को विप्र फाउंडेशन के जिलाध्यक्ष कमलकांत शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
“पंडित” शब्द को कलंकित करने का षडयंत्र इस दौरान संयोजक उमाशंकर महमिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिल्म का शीर्षक ‘घूसखोर पंडित’ रखना किसी गहरी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा पंडित शब्द सदियों से ज्ञान, संस्कार, मर्यादा और राष्ट्र सेवा का प्रतीक रहा है। इस शब्द के साथ ‘घूसखोर’ जैसा घृणित विशेषण जोड़ना न केवल ब्राह्मण समाज का अपमान है, बल्कि यह सांप्रदायिक और जातिगत द्वेष फैलाने की एक सोची-समझी कोशिश है। सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप विप्र फाउंडेशन का कहना है कि इस तरह की सामग्री समाज में वैमनस्य पैदा करती है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है किउक्त विवादित फिल्म के प्रसारण पर तत्काल रोक लगाई जाए। फिल्म के अपमानजनक शीर्षक को अविलंब बदला जाए। धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले निर्माताओं और प्लेटफॉर्म के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रतिनिधिमंडल में ये रहे मौजूद इस विरोध प्रदर्शन में राम गोपाल महमिया (संगठन महामंत्री, विफा), एडवोकेट विकास महमिया (सचिव, बार एसोसिएशन), प्रकाश सुरौलिया डब्ल्यू, अनिल जोशी, राकेश सहल, सुरेश तिवारी, संजय शुक्ला, गोपी पुरोहित, एडवोकेट रवि शुक्ला, एडवोकेट कमल शर्मा, वशिष्ठ शर्मा, विक्रांत जोशी, राजीव लोचन पांडे, विकास पुरोहित, ललित शर्मा, चंद्रप्रकाश कौशिक, प्रमोद शर्मा, शिवशंकर शर्मा डुमोली आदि मौजूद रहे।

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