विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में अधिसूचित नई नियमावली विनियम 2026 के विरोध में राजस्थान ब्राह्मण महासभा और सवर्ण समाज ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। समाज ने प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इन नियमावली को तत्काल वापस लेने की मांग की। ये विरोध परशुराम भवन में आयोजित एक बैठक के दौरान जताया गया। बैठक में समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित थे, जिन्होंने यूजीसी के नए नियमों को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। महासभा के जिलाध्यक्ष एडवोकेट संजय शर्मा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यूजीसी भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संस्था है। इसकी स्थापना 1956 में संसद के अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय शिक्षा को बढ़ावा देने, शिक्षण-परीक्षा-अनुसंधान के मानक तय करने और उच्च शिक्षा के विकास हेतु केंद्र व राज्य सरकारों को परामर्श देने के उद्देश्य से की गई थी। शर्मा ने बताया कि यूजीसी द्वारा जारी नई गाइडलाइंस विनियम 2026 के तहत यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव के नाम पर जो नियम लागू किए गए हैं, वे एकतरफा और असंतुलित हैं। उन्होंने कहा कि ये नियम पूर्व में लागू वर्ष 2012 के भेदभाव रोधी नियमों का अद्यतन रूप बताए जा रहे हैं, लेकिन व्यवहार में यह सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ अन्यायपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं। वक्ताओं ने आशंका जताई कि नई नियमावली से उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक समरसता प्रभावित होगी और सामान्य वर्ग के छात्रों में भय एवं हीन भावना उत्पन्न होगी। समाज ने सरकार से सभी वर्गों के लिए समान व न्यायसंगत संशोधित नियमावली लागू करने की मांग की। इस अवसर पर अशोक प्रधान, मुकेश भारद्वाज, संगठन महामंत्री अशोक कुमार वशिष्ठ, इंद्र कुमार मिश्रा, जितेंद्र कुमार शर्मा, उमेश कांत वशिष्ठ, लोकेश मिश्रा, टिल्लू शर्मा, सुरेश मिश्रा, रामानंद, महेश चंद, रमेश, रामोतार शर्मा, श्याम सुंदर मिश्रा, डीग राम शर्मा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।


