‘ब्राह्मण सांसदों ने क्या घुंघरू पहन रखा है’:बरेली सिटी मजिस्ट्रेट बोले- हालात सिविल वॉर जैसे, नहीं जागे तो पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी

‘क्या आप ब्राह्मणों का नरसंहार चाहते हैं। ब्राह्मण सांसद-विधायकों से पूछना चाहता हूं- क्या बहन-बेटियों का सड़कों पर रेप होगा, तब भी चुप रहोगे। क्या घुंघरू पहन रखा है, कब बोलेंगे? प्रयागराज डीएम किसके लिए रोटी सेंक रहा था? क्या वह शंकराचार्य है?’ यह बातें बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कही। ब्राह्मण वर्ग से आने वाले PCS अफसर अलंकार ने शंकराचार्य के अपमान और UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) के नए कानून से नाराज होकर सोमवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस्तीफे की वजह UGC का नया कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई बताई है। दैनिक भास्कर ने सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री से खास बातचीत की। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: आपने अचानक इस्तीफा क्यों दिया? जवाब: कुछ समय से प्रदेश में जो स्थितियां बनी हैं, वे बद से बदतर होती जा रही हैं। एक खास वर्ग, विशेषकर ब्राह्मणों के खिलाफ अभियान चल रहा है, जो अब असहनीय हो गया है। कहीं किसी के घर पर बुलडोजर चला दिया जाता है, तो कहीं थाने में पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है। जेल में एक डिप्टी जेलर ने एक दिव्यांग व्यक्ति और एक अन्य ब्राह्मण की हत्या कर दी। सबसे दुखद घटना प्रयागराज माघ मेले की है। अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के शिष्यों की चोटी (शिखा) पकड़कर उनके साथ मारपीट की गई। ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिन्हें देखकर रूह कांप जाए। जब प्रशासन के लोग ही पूज्य संतों और उनके शिष्यों के साथ ऐसा व्यवहार करेंगे, तो समाज में क्या संदेश जाएगा? क्या यह ब्राह्मणों के नरसंहार की तैयारी है? आखिर क्या करना चाहते है। सवाल: आप वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं? जवाब: आप कहते हो कि वह तो शंकराचार्य ही नहीं है। क्या कहना चाहते हैं। वह जो बड़ी- बड़ी गाडियों से घूम रहे हैं, क्या वो शंकराचार्य हैं। उनको आप VIP ट्रीटमेंट दे रहे हैं। उनके साथ आपके अधिकारी फोटो खींचा रहे है। उनके साथ आपके अधिकारी रोटी सेंक रहे है। वह कौन से शंकराचार्य हैं। प्रशासन इतनी चापलूसी क्यों कर रहा है। प्रयागराज का डीएम रोटी सेंक रहा है। उसके पास कौन सा अधिकार है, वहां पर रोटी सेंकने का। उनके साथ कुछ नहीं हुआ। एक तरफ तो असली शंकराचार्य के शिष्यों को पीटा जा रहा है, दूसरी तरफ प्रशासन के आला अधिकारी कुछ कथित संतों के साथ बैठकर रोटियां सेंक रहे हैं, फोटो खिंचवा रहे हैं। क्या प्रशासन अब चापलूसी का अड्डा बन गया है? जो हमारे आराध्य हैं, उनका अपमान हो रहा है। जो सत्ता के करीबी हैं, उन्हें VIP ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। यह दोहरा मापदंड क्यों? सवाल: UGC रेगुलेशन 2026 को लेकर आपकी क्या आपत्ति है? जवाब: यह रेगुलेशन (13 जनवरी 2026) अत्यंत भेदभावपूर्ण है। इसमें सामान्य वर्ग के मेधावी छात्र-छात्राओं को ‘स्वघोषित अपराधी’ मान लिया गया है। उसके साथ भेदभाव नहीं हो सकता। समता समितियों के माध्यम से बच्चों का मानसिक और शारीरिक शोषण होने की पूरी आशंका है। कोई भी निराधार शिकायत करके किसी का भविष्य बर्बाद कर सकता है। क्या हम अपने बच्चों को ऐसी व्यवस्था में पढ़ने भेजेंगे, जहां न्याय के नाम पर शोषण हो? मैं उन जनप्रतिनिधियों से भी पूछना चाहता हूं, जो ब्राह्मण समाज के नाम पर वोट लेकर आज ‘कॉर्पोरेट एम्पलाई’ की तरह चुप बैठे हैं। क्या आप ब्राह्मणों का नरसंहार चाहते हैं। सांसद-विधायकों से पूछना चाहता हूं- क्या घुंघरू पहन रखा है, कब बोलेंगे। क्या आप लोग वेट कर रहे हैं कि हमारी बहू-बेटियों का सड़कों पर रेप हो। क्या आप अपने आकाओं के आदेश का इंतजार कर रहे हैं? क्या आप तब बोलेंगे, जब स्थिति हाथ से निकल जाएगी? आपने ब्राह्मण के नाम टिकट लिया। ब्राह्मणों को वोट लिया। जब आप जीत गए। तो कोई मतलब ही नहीं। सवाल: भविष्य की स्थिति को आप कैसे देखते हैं? जवाब: आज सवर्ण समाज कहां सुरक्षित है। सोशल मीडिया देखिए देशभर में आज सामान्य वर्ग आपसे अलग हो चुका है। इस केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों अल्पमत की सरकारें है। आज न जनतंत्र बचा है, न गणतंत्र, यह केवल ‘भ्रम तंत्र’ है। सरकारें अल्पमत में हैं और केवल ‘बांटो और राज करो’ की नीति पर चल रही हैं। भाजपा अब भारतीय नहीं, ‘विदेशी जनता पार्टी’ जैसी हो गई है। मैने इसलिए ये इस्तीफा दिया है कि इससे एक मैसेज जाए कि सामान्य वर्ग अब आपके साथ नहीं है। मैंने अपना इस्तीफा राज्यपाल, जिलाधिकारी और चुनाव आयोग (ERO होने के नाते) को भेज दिया है। सवाल: अब आप क्या चाहते हैं? जवाब: मैं भगवान बजरंगबली को साक्षी मानकर यह कदम उठा रहा हूं। अब समय आ गया है कि समाज और अधिकारी इस अन्याय के खिलाफ ‘असहयोग आंदोलन’ की तरह बॉयकाट करें। अगर हम आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। हालात सिविल वॉर जैसे हो गए हैं। अब आगे की रणनीति हमारे ब्राह्मण समाज के विधायक और सांसद और हमारा समाज तय करेगा, आगे क्या करना है। इसलिए मैंने भगवान बजरंगबली को साक्षी मानकर ये कर किया है। अब जानिए अलंकार अग्निहोत्री के बारे में अलंकार अग्निहोत्री कानपुर के रहने वाले हैं। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। मां बैंक में थीं। 1998 में यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में अलंकार को 21वां स्थान मिला। इसके बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बीटेक किया और नौकरी करने लगे। 2014 में जब अलंकार के सभी छोटे भाई सेटल हो गए। बहन की शादी हो गई, तो उन्होंने नौकरी छोड़कर UPPCS की तैयारी की और 2019 में एग्जाम क्वालिफाई किया। ——————– ये खबर भी पढ़ें… शंकराचार्य के अपमान से नाराज बरेली सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा:लिखा- UGC कानून से भी दुखी; 4 अफसरों ने एक घंटे मनाया, लेकिन नहीं माने यूपी में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की वजह UGC का नया कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई बताई है। पढ़ें पूरी खबर…

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