भास्कर न्यूज। लुधियाना। दिमाग हमारे शरीर की हर गतिविधि को नियंत्रित करता है नींद, भूख, भावनाएं, ऊर्जा, फोकस, याददाश्त और बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी। लेकिन आज की तेज रफ्तार जिंदगी, स्क्रीन टाइम, काम का दबाव और निजी चिंताओं को संभालते-संभालते हमारा दिमाग लगातार ओवरलोड होता जा रहा है। थकान, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, कम फोकस, भूलने की आदत और मोटिवेशन की कमी इसी दिमागी थकान के संकेत हैं। ब्रेन मैनेजमेंट यानी दिमाग को सही तरीके से संभालना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है, क्योंकि जब दिमाग संतुलित रहता है तो शरीर भी कई गुना स्वस्थ महसूस करता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है। एक्सपर्ट के मुताबिक ब्रेन मैनेजमेंट कोई बड़ा विज्ञान नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों का सेट है। जब दिमाग को सही दिशा, आराम, पोषण और सोचने की आजादी मिलती है, तो वही दिमाग हमारी हेल्दी लाइफ का सबसे बड़ा आधार बन जाता है। स्वस्थ शरीर की शुरुआत हमेशा एक स्वस्थ, संतुलित और जागरूक दिमाग से होती है। {ब्रेन मैनेजमेंट का पहला चरण है दिमाग को ओवर थिंकिंग से बचाना। कई बार हम समस्या से ज्यादा उसके बारे में सोचते रहते हैं, जिससे मानसिक ऊर्जा खत्म होने लगती है। इसे रोकने के लिए ‘थॉट ब्रेक’ टेक्नीक बेहद कारगर है। जब भी दिमाग किसी एक चिंता पर घूमना शुरू करे, तुरंत 20–30 सेकेंड के लिए सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। इससे दिमाग को नया संकेत मिलता है और सोच का सर्कल टूट जाता है। धीरे-धीरे यह आदत तनाव कम कर देती है और फोकस को वापस लाने में मदद करती है। { दूसरा चरण है दिमाग को सही डाइट देना। हमारा ब्रेन 60% फैट से बना होता है और उसे ओमेगा-3, प्रोटीन और विटामिंस की जरूरत होती है। बादाम, अखरोट, बीज, हरी सब्जियां, दही, फल और भरपूर पानी दिमाग को सक्रिय रखते हैं। इसके साथ ही हर 2 घंटे में थोड़ी देर का डिजिटल ब्रेक भी जरूरी है, क्योंकि लगातार स्क्रीन देखने से न सिर्फ आंखें बल्कि दिमाग भी थक जाता है। {तीसरा चरण है दिमाग को शांत माहौल देना। नींद ब्रेन मैनेजमेंट की नींव है, लेकिन आज सबसे ज्यादा नींद ही प्रभावित होती है। रात को सोने से एक घंटे पहले फोन, टीवी और लैपटॉप बंद करना, कमरे की रोशनी कम करना और हल्का संगीत सुनना गहरी नींद को बढ़ावा देते हैं। दिमाग जब पूरी तरह आराम करता है, तभी वह अगले दिन बेहतर तरीके से काम कर पाता है। {चौथा चरण है भावनाओं को संतुलित करना। हर भावना एक केमिकल रिलीज करती है और जब गुस्सा, चिंता या दुख लगातार बने रहें तो यह शरीर पर भी असर डालते हैं। इसके लिए इमोशनल लेबलिंग तकनीक बेहद प्रभावी है। जैसे ही कोई भावना भारी लगे, उसे शब्दों में पहचानें मैं अभी परेशान हूं, मैं गुस्से में हूं इससे दिमाग तुरंत शांत होने लगता है, क्योंकि वह भावना को नियंत्रित करना सीखता है।


