कुछ लोगों को तंबाकू खाने के 5 साल के भीतर ही मुंह का कैंसर हो जाता है, जबकि कुछ लोगों को 20 साल बाद भी नहीं होता। इसका एक बड़ा कारण उनका ब्लड ग्रुप भी हो सकता है। ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप वालों में ए एंटीजन के कुछ खास गुण होते हैं। जैसे ज्यादा सूजन, इम्यून रिएक्शन, ब्लड क्लॉटिंग। जिन लोगों का ब्लड ग्रुप ओ है, उनके शरीर में न तो ए एंटीजन होता है और न ही बी एंटीजन। इसके कारण इन लोगों में मुंह के कैंसर का खतरा सबसे कम होता है। ब्लड ग्रुप बी वाले लोग भी तुलनात्मक रूप से सुरक्षित माने जाते हैं, क्योंकि उनमें ए एंटीजन की अनुपस्थिति होती है। हालांकि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। कैंसर के अन्य कारण जैसे पुरानी चोट, संक्रमण, सूजन वाली बीमारियां या आनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। यह स्टडी डॉ. देवाश्री शुक्ला, एमडीएस ओरल मेडिसिन रेडियोलॉजी और उनकी टीम ने की है। रिसर्च हाल में फ्रंटियर्स इन हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। यह जर्नल पियर-रिव्यूड है, यानी इसके निष्कर्षों की विशेषज्ञों ने जांच की है। रिसर्च के लिए भोपाल के 450 लोगों पर स्टडी की गई। जानिए… ब्लड ग्रुप और मुंह के कैंसर का रिश्ता शोध में ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के 128 में से 47, बी ग्रुप के 59 में से 24 और ओ ग्रुप के 162 में से 41 लोग ओरल कैंसर के शिकार पाए गए। ब्लड ग्रुप ए में ए एंटीजन की अधिकता सूजन और इम्यून रिएक्शन बढ़ाती है। वहीं, ब्लड ग्रुप ओ में ए और बी एंटीजन न होने के कारण प्राकृतिक सुरक्षा पाई गई। 50-60 साल के पुरुष, जो लंबे समय से तंबाकू का सेवन कर रहे हैं, उनमें कैंसर का खतरा सबसे अधिक पाया गया। ओरल कैंसर में भोपाल देश में दूसरे स्थान पर… मप्र में तंबाकू और सुपारी के अत्यधिक सेवन से ओरल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इससे भोपाल देश में ओरल कैंसर के मामलों में दूसरे स्थान पर है। शोधकर्ताओं की सलाह
{ब्लड ग्रुप ए और एबी वाले लोग तंबाकू से बचें। {नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं। {मुंह के घाव, सूजन को अनदेखा न करें। {कैंसर के लक्षण पहचानने में सतर्क रहें। कैंसर के ये भी संभावित कारक
कैंसर केवल तंबाकू से ही नहीं, बल्कि कई अन्य कारणों से भी हो सकता है। इनमें खराब जीवनशैली, ज्यादा अल्कोहल सेवन, प्रदूषण, आनुवांशिक कारण, और ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण शामिल हैं। इसके अलावा लंबे समय तक धूप में रहना और रेडिएशन के संपर्क में आना भी कैंसर का कारण बन सकते हैं। स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर और नियमित जांच कराकर इनसे बचा जा सकता है। अब सिर्फ ओरल कैंसर पर सर्वे… अब ओरल कैंसर के 500 मरीजों पर बड़ा अध्ययन होगा। अन्य क्षेत्रों में भी रिसर्च का विस्तार होगा। ज्यादा सटीक निष्कर्ष के लिए डेटा का विश्लेषण किया जाएगा और हाई-रिस्क जोन की पहचान की जाएगी।


