सुहागपुरा में मंगलवार को सहकारी समिति द्वारा आयोजित एक बैठक में भंवर सेमला बांध से जुड़े 10 गांवों के किसानों ने सिंचाई सुविधाओं की मांग उठाई। किसानों ने आगामी राज्य बजट में अधूरी नहरों को पूरा करने के लिए विशेष प्रावधान करने की अपील की। किसानों ने बताया कि भंवर सेमला बांध का निर्माण हुए काफी समय हो गया है, लेकिन इसकी नहरों का कार्य आज भी अधूरा है। अधिकांश नहरें कच्ची होने के कारण पानी रास्ते में ही बहकर बर्बाद हो जाता है, जिससे खेतों तक पर्याप्त जल नहीं पहुंच पाता। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र की बड़ी मात्रा में कृषि भूमि अभी भी असिंचित है। बैठक में किसानों ने सामूहिक कार्ययोजना बनाते हुए सरकार से मांग की कि छोटा मायंगा से छायण पनावला, बिलड़ी, डांगपुरा, ओखाजी का माल, मोरियानखेड़ा, बोरानखेड़ा, मोटा धामनिया और छोटा धामनिया सहित कुल 10 गांवों की असिंचित भूमि में स्थायी सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। किसानों का तर्क है कि यदि नहरों को पक्का करके पूर्ण रूप से विकसित किया जाए, तो क्षेत्र के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे कृषि पर उनकी निर्भरता मजबूत होगी और उपज में वृद्धि होगी। इस बैठक में सहकारी समिति सुहागपुरा के अध्यक्ष गोपीलाल मीणा, पूर्व पंचायत समिति सदस्य शिवनारायण सेन, जिला परिषद सदस्य पिंकेश पटवा, गंगाराम पटेल, नारजी गुर्जर, मदन मालवीय (लैंप सदस्य), भारत टेलर, उदयलाल मीणा, प्रभुलाल मीणा, चंपालाल बावरी, पांचूराम मीणा, खातूराम मीणा, भेरूलाल मीणा, केसूराम मीणा और खातूराम (बोरानखेड़ा) सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों ने एक स्वर में कहा कि यह उनकी वर्षों पुरानी मांग है और यदि इसका जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। बैठक के माध्यम से सरकार को स्पष्ट संदेश दिया गया कि क्षेत्र की सिंचाई समस्या का स्थायी समाधान अब आवश्यक है।


