भक्तामर महामंडल विधान: रत्नों की वृष्टि व गीत-संगीत के साथ समर्पित किए अर्घ्य

भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर की ओर से आयोजित तीन दिवसीय भक्तामर महामंडल विधान का शनिवार को दिगंबर जैन संत मुनि आदित्यसागर व अप्रमितसागर ससंघ के सानिध्य में तरणताल परिसर में शुभारंभ हुआ। विधान में 400 से अधिक श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। विधान का शुभारंभ चांदबाई, नरेश, नितिन और पीयूष गोधा ने ध्वजारोहण से किया। विधान मंडल पर प्रथम मुख्य कलश स्थापना का लाभ सौधर्म इंद्र व शची इंद्राणी शांतिलाल-मंजू शाह व अन्य कलश की स्थापना कुबेर इंद्र ओमचंद, रिखबचंद बाकलीवाल, चक्रवर्ती इंद्र शुभ काला, बाहुबली इंद्र राकेश पहाडि़या व महायज्ञनायक इंद्र अभिषेक पाटनी ने की। धन-कुबेर अजय बाकलीवाल भक्ति संगीत के बीच रत्नों की वृष्टि करते रहे। विधान के दौरान जैन संत अप्रमित सागर की मधुर प्रस्तुतियों के बीच अर्घ्य समर्पित किए गए। मंडल विधान में मंडप बनाकर, कलश स्थापना और अखंड दीप प्रज्ज्वलन किया। इसमें विभिन्न पात्रों के माध्यम से 48 अर्घ्य समर्पित किए। साथ ही इस दौरान जल, फल, पुष्प, नैवेद्य आदि का उपयोग किया। विधान के बाद शाम को श्रुत समाधान तथा मुनि की संगीतमय आरती की गई। मुनि ने श्रद्धालुओं को बताई भक्तामर महामंडल विधान की महिमा भक्तामर महामंडल विधान के दौरान प्रवचन में मुनि आदित्यसागर महाराज ने कहा कि भक्तामर महामंडल विधान की महिमा अपार है। यह जैन धर्म का शक्तिशाली अनुष्ठान है, जो भक्तामर स्तोत्र के 48 श्लोकों पर आधारित है, जिसे श्रद्धा और भक्ति से करने पर कष्ट, भय, नकारात्मक ऊर्जा और कर्मों के बंधनों से मुक्ति मिलती है। यह विधान शांति, समृद्धि, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है और आचार्य मानतुंग स्वामी द्वारा कारागार से निकलने के लिए की गई आराधना का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह विधान कर्मों के बंधनों को तोड़ता है और आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाता है। इसके नियमित पाठ से साधक को आत्मविश्वास और जीवन में स्थिरता मिलती है।

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